देश के 43 शहरों में प्रदूषण का कहर, बठिंडा में AQI 1069 तो पानीपत में 1003; दिल्ली-NCR की हवा भी बेहद खराब
सर्दियों की दस्तक और दीपावली के बाद देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है। पराली जलाने, पटाखों के धुएं और मौसम में बदलाव के कारण हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के 43 शहरों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर दर्ज की गई। पंजाब का बठिंडा और हरियाणा का पानीपत सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर रहे।
बठिंडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 1069 दर्ज किया गया, जबकि पानीपत में यह आंकड़ा 1003 तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है।
टॉप-10 प्रदूषित शहरों में हरियाणा और यूपी का दबदबा
शुक्रवार को जारी प्रदूषण के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब का बठिंडा 1069 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। हरियाणा का पानीपत 1003 AQI के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश का मेरठ 961 AQI के साथ तीसरे नंबर पर दर्ज किया गया।
इसके अलावा हरियाणा के सिरसा में 938, उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 899, हरियाणा के सोनीपत में 917, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 844, हरियाणा के रोहतक में 847 और फरीदाबाद में 821 AQI दर्ज किया गया। नोएडा में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 824 रहा। इस तरह शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच और उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल हैं।
दिल्ली-NCR में भी प्रदूषण से हाल बेहाल
दिल्ली-एनसीआर में भी लोगों को प्रदूषित हवा के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा में AQI 795, नई दिल्ली में 729 और गुरुग्राम में 647 दर्ज किया गया। हवा में बढ़ते प्रदूषण के चलते लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
GRAP का दूसरा चरण लागू, प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली मेट्रो ने सप्ताह के कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे भी शुरू किए हैं। यातायात का दबाव कम करने के लिए सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में अंतर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेने से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं। अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों की परेशानी भी गंभीर हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों पर प्रदूषण का असर अधिक पड़ने की आशंका रहती है।
दीपावली के बाद हर साल बिगड़ते हैं हालात
अधिकारियों के अनुसार, मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में सर्दियों के दौरान हर साल वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन जाता है। दीपावली के आसपास पटाखों के धुएं और पराली जलाने की घटनाओं के कारण स्थिति और खराब हो जाती है।
अन्य महानगरों में अपेक्षाकृत कम प्रदूषण
देश के दूसरे बड़े महानगरों में वायु प्रदूषण का स्तर उत्तर भारत के मुकाबले कम दर्ज किया गया। कोलकाता में AQI 204, मुंबई में 172 और हैदराबाद में 134 रहा। वहीं चेन्नई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 85 दर्ज किया गया। आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल उत्तर भारत के शहर वायु प्रदूषण की सबसे गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
