राम मंदिर के चढ़ावे पर सियासत तेज: अखिलेश के आरोपों से मचा बवाल, चंपत राय ने दी सफाई
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावे की राशि को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें भगवान राम और ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कोई अनुचित कार्य किया गया होगा तो उसका न्याय स्वयं भगवान राम करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को कोई संदेह है तो जांच कराए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
दिनेंद्र दास ने कहा कि शासन और प्रशासन जो भी निर्णय लेंगे, वह उन्हें स्वीकार होगा। उनके अनुसार ट्रस्ट के कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच से लोगों की शंकाएं दूर होती हैं तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
सपा ने उठाए सवाल
ट्रस्ट सदस्य के बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने आरोपों को दोहराया। सपा प्रवक्ता सुनील साजन ने कहा कि भगवान राम के नाम पर पहले भी कई घोटालों के आरोप लगते रहे हैं और जब उनकी पार्टी सवाल उठाती है तो उसे दंड की बात कहकर जवाब दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सच सामने आना चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
चंपत राय ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बीच चंपत राय ने ट्रस्ट की ओर से स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में समय-समय पर आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया होती रहती है, जिसमें ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल रहते हैं। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और वर्तमान में भी ऑडिट का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि अब तक ऑडिट में कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
सुभासपा का सपा पर पलटवार
इस मुद्दे पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भी समाजवादी पार्टी को घेरने का प्रयास किया। पार्टी प्रवक्ता पीयूष मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अखिलेश यादव को राम मंदिर के चढ़ावे की अचानक चिंता होने लगी है, जबकि वे स्वयं कभी मंदिर दर्शन के लिए नहीं पहुंचे।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में वर्ष 1990 की कारसेवक गोलीकांड की घटना का उल्लेख करते हुए सपा पर निशाना साधा। पीयूष मिश्र ने कहा कि जिन लोगों के लिए राम मंदिर हमेशा राजनीतिक मुद्दा रहा है, वे अब ट्रस्ट पर सवाल उठाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर विपक्ष पारदर्शिता और जांच की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर ट्रस्ट और उससे जुड़े लोग सभी आरोपों को निराधार बताते हुए नियमित ऑडिट प्रक्रिया का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक सियासी रंग ले सकता है।
