जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई के आदेश से गरमाई सियासत, चंद्रशेखर आजाद बोले- सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पर ध्वस्तीकरण के आदेश को लेकर सियासत तेज हो गई है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए इस कार्रवाई को “सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा” बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के बजाय राजनीतिक और सांप्रदायिक आधार पर कार्रवाई कर रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाने का आदेश बेहद चिंताजनक है। उन्होंने याद दिलाया कि बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार राज्यों को फटकार लगा चुका है, इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह की कार्रवाई से बाज नहीं आ रही है।
‘प्रशासनिक आदेश अंतिम फैसला नहीं’
नगीना सांसद ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण का आदेश अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार विश्वविद्यालय को सक्षम न्यायालय में चुनौती देने का पूरा संवैधानिक अधिकार है और जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि अंतिम फैसला आने से पहले बुलडोजर चलाया जाता है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत होगा।
सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप
चंद्रशेखर आजाद ने योगी सरकार पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, प्रयागराज, गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ के कुछ संस्थानों के नाम भी शामिल हैं, लेकिन उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। इसके विपरीत एक स्थापित विश्वविद्यालय को बुलडोजर की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार के दोहरे मापदंड और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई रोकने की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने राज्य सरकार से मांग की कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। साथ ही विश्वविद्यालय को उपलब्ध सभी वैधानिक और न्यायिक विकल्पों का उपयोग करने का पूरा अवसर दिया जाए और अंतिम न्यायिक निर्णय का सम्मान किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर के कुछ हिस्सों को अवैध निर्माण बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। प्राधिकरण का दावा है कि संबंधित निर्माण आवश्यक अनुमति के बिना किए गए हैं। आदेश सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।
जहां विपक्षी दल इस कार्रवाई को राजनीतिक और मुस्लिम विरोधी मानसिकता से जोड़ रहे हैं, वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि यह केवल नियमों और कानून के पालन की कार्रवाई है। ऐसे में जौहर विश्वविद्यालय का मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की सियासत का भी अहम मुद्दा बनता जा रहा है।
