‘हमें किसी पार्टी से लेना-देना नहीं, हम सिर्फ धर्म के मुद्दे उठाते हैं’: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान
बीजेपी-कांग्रेस से दूरी बताई, गौमाता और मतदाता के अधिकार को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
नई दिल्ली: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों और गौमाता के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं और किसी दल के समर्थन या विरोध की राजनीति नहीं करते।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान वर्ष 2015 में काशी में उनके आंदोलन पर लाठीचार्ज हुआ था। उस समय बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता उनके समर्थन में खड़े थे, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि वे बीजेपी के समर्थक थे।
‘सपा सरकार ने हम पर लाठियां चलवाई’
शंकराचार्य ने कहा, “जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब हमारे ऊपर लाठीचार्ज कराया गया। उस समय करीब पांच हजार बीजेपी कार्यकर्ता हमारे साथ खड़े थे। अखिलेश यादव ने हमें बीजेपी का समर्थक समझ लिया और हमारे ऊपर लाठी चलवा दी। लेकिन हमारा किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं था।”
उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग उन्हें बीजेपी का आलोचक बताते हैं, जबकि वे किसी भी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं।
‘बीजेपी हो या कांग्रेस, हमें सत्ता से कोई मतलब नहीं’
शंकराचार्य ने कहा कि बीजेपी, कांग्रेस और अन्य सभी दल राजनीतिक पार्टियां हैं, जबकि उनका उद्देश्य केवल धर्म और धार्मिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि उन्हें न सत्ता से कोई अपेक्षा है और न ही सरकारी सुविधाओं की जरूरत।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से कोई अनुदान नहीं लेते। हमारे विद्यालय भी बिना सरकारी ग्रांट के चलते हैं। हमारा मानना है कि सरकारी धन में वह पवित्रता नहीं है, इसलिए हमने पहले भी उसका विरोध किया था और आज भी उसी सिद्धांत पर कायम हैं।”
‘हम मुद्दे की लड़ाई लड़ते हैं’
उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि मुद्दों के पक्ष में है।
“हम बीजेपी या कांग्रेस नहीं देखते। हम केवल अपने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को देखते हैं और उनके लिए संघर्ष करते हैं।”
गौमाता और मांस निर्यात पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में उनका सबसे बड़ा मुद्दा गौमाता की रक्षा और मतदाताओं के अधिकार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता ने सरकारों को मांस बिक्री और निर्यात के लिए वोट दिया था।
उन्होंने कहा, “हम लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने मांस बेचने और निर्यात करने के लिए वोट दिया था। किसी ने भी ऐसा नहीं कहा। नेता जनता का वोट लेकर ऐसे फैसले कर लेते हैं, जिनकी जानकारी तक लोगों को नहीं होती। क्या जनता की सहमति के बिना सरकारों को ऐसा करने का अधिकार है?”
उन्होंने आगे कहा कि वे स्वयं किसी जीव की हत्या के पक्षधर नहीं हैं और यदि जनता के वोट से चुनी गई सरकारें करोड़ों पशुओं का मांस कटवाकर बेच रही हैं, तो यह नैतिक और धार्मिक दृष्टि से गंभीर प्रश्न है।
‘हमें सिर्फ धर्म से लेना-देना है’
अपने संबोधन के अंत में शंकराचार्य ने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष धर्म और उसके प्रतीकों की रक्षा के लिए है।
उन्होंने कहा, “यह हमारे धर्म का मूलभूत प्रश्न है। हमें किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। जब हमें बीजेपी से ही कोई लेना-देना नहीं है, तो फिर किसी दूसरी पार्टी से क्यों होगा। हमारा संबंध केवल धर्म और धर्म के प्रतीकों से है।”
