मृत्युभोज जैसी कुरीति को समाज मिलकर समाप्त करे: पंडित सतेंद्र
देवबंद। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने मृत्युभोज की प्रथा को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया है।
पंडित सतेंद्र शर्मा ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि किसी परिवार में मृत्यु होने के बाद वह पहले ही गहरे शोक और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में मृत्युभोज के नाम पर आर्थिक बोझ डालना न तो मानवीय है और न ही धार्मिक दृष्टि से उचित। उन्होंने कहा कि मृत्युभोज की परंपरा के कारण अनेक परिवार सामाजिक दबाव में आकर अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करते हैं। कई गरीब परिवारों को इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ता है, जिससे वह लंबे समय तक आर्थिक संकट झेलते हैं। कहा कि यह परंपरा अब श्रद्धा से अधिक दिखावे का माध्यम बनती जा रही है, जबकि दिवंगत आत्मा की सच्ची श्रद्धांजलि प्रार्थना, दान और जरुरतमंदों की सहायता में निहित है। पंडित सतेंद्र शर्मा ने लोगों से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वह न तो मृत्युभोज आयोजित करें और न ही उसमें सहभागी बनें। इसके स्थान पर दिवंगत की स्मृति में जरुरतमंदों की सहायता, गरीबों को भोजन, पौधारोपण अथवा अन्य जनकल्याणकारी कार्य करें।
