राम मंदिर निर्माण लागत को लेकर नए दावे, पूर्व लेखा प्रभारी ने SIT को सौंपे दस्तावेज

राम मंदिर निर्माण लागत को लेकर नए दावे, पूर्व लेखा प्रभारी ने SIT को सौंपे दस्तावेज

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच के बीच एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य सौंपे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई नए दावे भी किए हैं।

महिपाल सिंह का आरोप है कि राम मंदिर निर्माण की प्रारंभिक अनुमानित लागत लगभग 800 करोड़ रुपये थी, लेकिन बाद में निर्माण कार्यों पर करीब 2200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उनका कहना है कि इस दौरान कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए वित्तीय अनियमितताएं की गईं।

गौरतलब है कि 26 जुलाई को SIT अध्यक्ष एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने महिपाल सिंह को ई-मेल भेजकर उनके आरोपों से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने का अवसर दिया था। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने की बात भी कही गई थी। इसके बाद महिपाल ने अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जांच टीम को सौंप दिए।

महिपाल सिंह इससे पहले भी 9 जून को कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उनका दावा था कि वर्ष 2021 में ही उन्हें चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों की जानकारी मिल गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बैंककर्मी जरूरत से अधिक नोटों की गड्डियां ले जाकर धन की हेराफेरी करते थे। जब उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों को जानकारी दी तो उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई और बाद में उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई।

पूर्व लेखा प्रभारी ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए ऐसे व्यक्ति को प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया, जिसे सिविल इंजीनियरिंग का पर्याप्त अनुभव नहीं था। उनके अनुसार इससे निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए। उन्होंने निर्माण सामग्री की खरीद, संपत्तियों के अधिग्रहण और विभिन्न भुगतान प्रक्रियाओं पर भी आपत्ति जताई है।

महिपाल सिंह ने SIT को दिए गए अपने दस्तावेजों में दावा किया है कि कुछ व्यक्तियों के नाम पर ऐसे भुगतान किए गए, जिन्होंने कोई वास्तविक कार्य नहीं किया था। इसके अलावा उन्होंने ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं, ट्रस्ट के वित्तीय संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। महिपाल का आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने भुगतान प्रक्रिया और बिलों के निस्तारण में मनमानी की, जिससे निर्माण कार्यों से जुड़ी कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

फिलहाल SIT पूरे मामले की जांच कर रही है और महिपाल सिंह द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों एवं आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इन दावों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।