‘अगर धर्म संकट में है तो देश…’, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

‘अगर धर्म संकट में है तो देश…’, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में भारत की संस्कृति, धर्म और राष्ट्र को लेकर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को बिना किसी हमले या धर्म परिवर्तन के शांति और समृद्धि का रास्ता दिखाया है. उन्होंने कहा कि अगर धर्म संकट में है तो देश को भी नुकसान होगा.

भागवत ने कहा कि भारत की सोच केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है. देश की प्रगति के साथ समाज में शांति, जिम्मेदारी, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों को भी महत्व देना जरूरी है. हाल के एक कार्यक्रम में भी उन्होंने कहा था कि भारत की प्रगति का मकसद शांति और पूरी मानवता की भलाई होना चाहिए.

धर्म और राष्ट्र को लेकर क्या बोले भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता. उनके अनुसार धर्म केवल पूजा या किसी एक धार्मिक पहचान का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन और समाज को सही दिशा देने वाली सोच है. भागवत इससे पहले भी धर्म और ‘रिलिजन’ के बीच अंतर की बात कह चुके हैं. सितंबर में उज्जैन में उन्होंने कहा था कि भारत में धर्म की अवधारणा पश्चिमी देशों में इस्तेमाल होने वाले ‘रिलिजन’ के विचार से अलग है. उन्होंने युवाओं से भारतीय परंपरा को समझने और दूसरे मतों का सम्मान करने की बात कही थी.

भक्ति से ईश्वर के करीब पहुंचने की बात

भागवत ने कहा कि भक्ति और सही सोच के जरिए इंसान ईश्वर के करीब पहुंच सकता है. उनके अनुसार इंसान को अपने जीवन में सत्य और सही रास्ते की तलाश करनी चाहिए. न्यूयॉर्क में अगस्त 2026 में दिए एक संबोधन में भी भागवत ने कहा था कि अलग-अलग धार्मिक रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य एक हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा था कि हर इंसान की गरिमा समान है और विविधता के बीच एकता को समझना जरूरी है.

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