AAP के 7 सांसदों के BJP में शामिल होने से कैसे बदलेगा खेल? जानें, राज्यसभा का नंबर गेम

AAP के 7 सांसदों के BJP में शामिल होने से कैसे बदलेगा खेल? जानें, राज्यसभा का नंबर गेम

राघव चड्ढा की अगुवाई में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के बीजेपी के साथ जाने के फैसले के बाद राज्यसभा में नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है। बता दें कि आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े चेहरों में गिने जाने वाले राघव चड्ढा ने शुक्रवार को अपने अन्य 2 साथी सांसदों के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया। साथ ही चड्ढा ने दावा किया कि AAP के कुल मिलाकर 7 सांसद साथ में हैं जिनमें पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हरभजन सिंह भी शामिल हैं। इस घटनाक्रम के बाद उच्च सदन की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है और बीजेपी अपने दम पर बहुमत के काफी करीब पहुंच गई है।

क्या इन सांसदों पर दल-बदल कानून लागू होगा?

बता दें कि राघव चड्ढा के मुताबिक AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया है। यह बदलाव दल-बदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत दो-तिहाई बहुमत की शर्त को पूरा करता है, इसलिए इन सांसदों पर कोई अयोग्यता लागू नहीं होगी। यानी कि अब बीजेपी के मौजूदा राज्यसभा सांसदों की संख्या में सीधे-सीधे 7 सांसदों का इजाफा हो जाएगा। ऐसे में बीजेपी के लिए राज्यसभा में किसी भी बिल को पास कराना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा।

BJP की संख्या में कैसे हो जाएगा बड़ा इजाफा?

AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद सदन में पार्टी के सदस्यों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो जाएगी। इससे सदन में सरकार की स्थिति और मजबूत हो जाएगी। BJP में शामिल होने वाले सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. राघव चड्ढा (पंजाब)
  2. हरभजन सिंह (पंजाब)
  3. संदीप पाठक (पंजाब)
  4. अशोक मित्तल (पंजाब)
  5. राजिंदर गुप्ता (पंजाब)
  6. विक्रम सहनी (पंजाब)
  7. स्वाति मालीवाल (दिल्ली)

राज्यसभा में कमजोर हो जाएगी AAP की स्थिति

वहीं, इन बदलावों के बाद AAP की राज्यसभा में स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी। अब राज्यसभा में पार्टी के पास केवल 3 सांसद रह जाएंगे:

  1. संजय सिंह (दिल्ली)
  2. एन. डी. गुप्ता (दिल्ली)
  3. बलबीर सिंह सीचेवाल (पंजाब)

आखिर पंजाब में इस बदलाव का क्या होगा असर?

बता दें कि इन बीजेपी का दामन थामने वाले 7 सांसदों में से 6 सांसद पंजाब से हैं, इसलिए इसका सीधा असर सूबे की राजनीति पर भी देखा जाएगा। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बदलाव AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बीजेपी और NDA के लिए कैसे बदलेगी स्थिति?

राज्यसभा में 12 मनोनीत सीटें होती हैं। इनमें से 5 सांसद पहले से ही BJP के समर्थन में माने जाते हैं और उन्हें BJP की 113 की संख्या में शामिल किया गया है। ये सांसद हैं:

  1. उज्ज्वल निकम (कानून)
  2. सी. सदानंद मास्टर (सामाजिक कार्य)
  3. गुलाम अली खटाना (सामाजिक कार्य)
  4. हरष वर्धन श्रृंगला (कूटनीति)
  5. सतनाम सिंह संधू (शिक्षा)

इसके अलावा 7 मनोनीत सांसद स्वतंत्र माने जाते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते हैं:

  1. हरिवंश नारायण सिंह (पत्रकारिता)
  2. मीनााक्षी जैन (साहित्य एवं शिक्षा)
  3. सुधा मूर्ति (सामाजिक कार्य)
  4. वीरेंद्र हेगड़े (सामाजिक कार्य)
  5. इलैयाराजा (कला)
  6. वी. विजयेंद्र प्रसाद (कला)
  7. पी. टी. उषा (खेल)

इन सभी को मिलाकर सरकार की प्रभावी ताकत 120 तक पहुंच जाती है। वहीं, इस बदलाव के बाद सदन में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की स्थिति भी काफी मजबूत हो जाती है। बीजेपी के खुद के 113 सांसदों, 7 मनोनीत सांसदों और सहयोगी पार्टियों के 28 सांसदों के साथ सदन में NDA सांसदों की कुल संख्या 148 तक पहुंच जाती है। इस तरह बीजेपी के पास राज्यसभा में बहुमत के लिए जरूरी 123 सांसदों से कुल 25 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन है।

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