श्रीराम मंदिर के चढ़ावा में गबन मामले की PMO ने मांगी रिपोर्ट, अयोध्या पहुंचे निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्र की धनराशि के गबन प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रामजन्मभूमि परिसर स्थित सभागार में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ बैठक कर मामले की विस्तार से जानकारी ली है।
ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र के अचानक अयोध्या आगमन को प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश से जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में पीएमओ ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। हालांकि सर्किट हाउस से निकलते समय उन्होंने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। ‘दैनिक जागरण’ से दूरभाष पर उन्होंने कहा, वह निर्माण संबंधी कार्यों से जुड़े हैं, दानपात्र का प्रकरण मंदिर प्रबंधन से संबंधित है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य नृपेंद्र मिश्र, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष भी हैं। वह राम मंदिर निर्माण के प्रारंभिक दिनों से ही नियमित अयोध्या पहुंच कर पाक्षिक समीक्षा बैठक करते रहे हैं और प्रत्येक शनिवार को कार्यदायी एजेंसियों के साथ आनलाइन मीटिंग भी करते हैं। इस बार की समीक्षा बैठक आगामी 13 जून को नियत है। इसमें प्रतिभाग करने के लिए समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का अयोध्या आगमन भी पूर्व निर्धारित है। कार्यदायी एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, बैठक से संबंधित ई-मेल भी प्राप्त हो चुका है।
राम मंदिर के दानपात्र की धनराशि में गबन का मामला पकड़ में आने और आधा दर्जन संदिग्ध कर्मियों के पकड़े जाने के बाद जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट किया और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह भी हमलावर हो उठे, तो देश-प्रदेश की राजनीति गरमाने के साथ सोमवार को ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या पहुंच गए।
सूत्रों ने बताया कि उन्होंने परिसर में ही सभागार में सोमवार की शाम ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक की। इस बैठक में उनके अलावा ट्रस्ट के चार सदस्य मौजूद रहे। यही चारों सदस्य राम मंदिर से जुड़ा समस्त प्रबंधन भी देखते हैं। रात्रि विश्राम के पश्चात मंगलवार की सुबह सर्किट हाउस से दिल्ली रवाना होते समय मीडियाकर्मी भी पहुंच गए। पत्रकारों ने गबन प्रकरण पर उनसे सवाल किया, तो वह चुप्पी साध गए। हालांकि, दैनिक जागरण ने जब दूरभाष पर उनसे दानपात्र में गबन प्रकरण पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो नृपेंद्र मिश्र ने साफ कहाकि वह निर्माण संबंधी कार्यों का निरीक्षण करने अयोध्या गए थे। वह निर्माण कार्यों से जुड़े हैं, यह प्रबंधन से जुड़ा मामला है।
संदिग्ध कर्मियों से अब भी पूछताछ जारी
दानपात्र की धनराशि में हेराफेरी करने के आरोप में पकड़े गए कर्मियों से पूछताछ का क्रम अब भी निरंतर चल रहा है। सूत्रों ने बताया कि इनकी निशानदेही पर अब तक दो-तीन स्थानों से पुलिस ने बड़ी रकम बरामद भी कर ली है। गणना से ही जुड़े कुछ कर्मी अभी रडार पर हैं। इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जल्द ही इनसे भी पूछताछ की जा सकती है। ये संदिग्ध कर्मी ट्रस्ट के साथ बैंक व कलेक्शन एजेंसी से जुड़े हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि इन कर्मियों की संख्या अब चार से बढ़ कर छह से नौ तक पहुंच गई है।
आंतरिक आडिट में कम मिली दान की धनराशि
रामजन्मभूमि परिसर के दानपात्रों में भक्तों की ओर से डाली गई धनराशि का बीते कई दिनों से ट्रस्ट आंतरिक आडिट करा रहा है। सूत्रों ने बताया कि यह आडिट पखवारे भर से चल रहा है। इसी दौरान यह पाया गया कि राम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या तो अधिक है, परंतु दान की धनराशि पहले से कम हो गई है। यह आशंका तब पुष्ट हो गई, जब गोपनीय कक्ष में छिपा कर लगाए गए कैमरे को देखा गया और एक कर्मी ने ही सूचना दी।
हालांकि बाद में इस कर्मी से भी रकम बरामद की गई, परंतु उसकी मुखबिरी से ही मामला पकड़ में आया और संदिग्धों को ट्रैस करके पूछताछ की गई और रकम भी बरामद हुई। सूत्रों ने बताया कि यह गबन किसी एक दिन में नहीं, अपितु धीरे-धीरे आपसी मिलीभगत से काफी दिनों से किया जा रहा था। यही कारण रहा कि सघनता से जांच होने के बाद भी गणना वाले कक्ष से बड़ी रकम पार होती गई। मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि यह रकम एक स्थान पर एकत्रित होती थी, वहां से आपस में बंटवारा होता था।
