शरद पवार का बीजेपी पर निशाना, बोले- नेहरू के योगदान की किसी से तुलना नहीं हो सकती

शरद पवार का बीजेपी पर निशाना, बोले- नेहरू के योगदान की किसी से तुलना नहीं हो सकती

New Delhi : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की तुलना देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि नेहरू के राष्ट्र निर्माण और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनकी तुलना किसी अन्य नेता से करना उचित नहीं है।

राकांपा (शप) के 27वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन नेहरू का योगदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है।

पवार ने कहा, “नेहरू ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई के दौरान कई वर्षों तक जेल में रहकर संघर्ष किया। राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका और त्याग को देश कभी नहीं भूल सकता। नेहरू, नेहरू हैं और उनकी तुलना किसी अन्य व्यक्ति से नहीं की जा सकती।”

इस दौरान पवार ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता Girish Mahajan के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi और Rajiv Gandhi पर सिख समुदाय के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाया था।

पवार ने कहा कि ऐसा बयान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार को इंदिरा गांधी के लिए एक बड़ा बलिदान बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता से समझौता न करने की उनकी प्रतिबद्धता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय ने देश की सीमाओं की रक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

दरअसल, गिरीश महाजन ने हाल ही में Operation Blue Star को “काला दिवस” बताते हुए इसकी तुलना अफगान शासक Ahmad Shah Abdali के हमले से की थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए महाजन को मंत्री पद से हटाने की मांग की है।

भाजपा नेता का आरोप है कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को पंजाब और सिखों के पवित्र धार्मिक परिसर में भेजकर सैन्य कार्रवाई करवाई थी। वहीं विपक्ष इस बयान को इतिहास और सिख समुदाय के योगदान का अपमान बताते हुए सरकार से जवाब मांग रहा है।

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