UCC पर हिमंत का कांग्रेस पर बड़ा हमला, ओवैसी बोले- मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश; असम विधानसभा से बिल पास

UCC पर हिमंत का कांग्रेस पर बड़ा हमला, ओवैसी बोले- मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश; असम विधानसभा से बिल पास

असम विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित कर दिया. इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद राज्य स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का तीसरा और पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है.

इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को सभी समुदायों के लिए एक समान बनाना है. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.

बिल के प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा लिव-इन संबंधों के रजिस्ट्रेशन को जरूरी बनाना शामिल है. इसके अलावा बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय करने का प्रावधान किया गया है.

“1925 में कांग्रेस ने ही उठाई थी UCC की मांग”: असम विधानसभा में हिमंत का विपक्ष पर हमला

असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि 1925 में सबसे पहले कांग्रेस ने ही UCC की मांग उठाई थी और 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका समर्थन किया था.

सर्मा ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं रह गई है और केवल “एक विशेष समुदाय” का प्रतिनिधित्व कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस UCC का विरोध संविधान या जनजातीय परंपराओं के आधार पर नहीं, बल्कि “कुरान और शरीयत” के नजरिए से कर रही है.

“मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश”: UCC बिल पर ओवैसी का हमला

एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi ने असम विधानसभा में पास हुए UCC बिल को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह मुसलमानों पर “पिछले दरवाजे से हिंदू कानून थोपने” की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और तलाक जैसे मामलों में हिंदू सिद्धांत लागू किए जा रहे हैं, जबकि इसे “समान कानून” बताया जा रहा है. ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि केवल हिंदू संस्कृति की रक्षा की जा रही है, जबकि मुसलमानों को इन नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

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