शोभित विश्वविद्यालय के नवम् दीक्षांत समारोह में बेटियों का जलवा, 150 स्वर्ण पदकों में 100 पर छात्राओं का कब्जा

शोभित विश्वविद्यालय के नवम् दीक्षांत समारोह में बेटियों का जलवा, 150 स्वर्ण पदकों में 100 पर छात्राओं का कब्जा

गंगोह में भव्य समारोह का आयोजन, 85 शोधार्थियों को पीएचडी और 600 विद्यार्थियों को स्नातक-स्नातकोत्तर की डिग्रियां प्रदान की गईं

प्रोफेसर एम. मोनी को मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से किया सम्मानित, विद्यार्थियों से राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने का आह्वान

गंगोह। शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह में शनिवार, 24 अक्टूबर को नवम् दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और महिला सशक्तीकरण की शानदार झलक देखने को मिली। विश्वविद्यालय के 150 स्वर्ण पदक विजेताओं में 100 छात्राओं ने स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, जबकि 50 छात्र स्वर्ण पदक से सम्मानित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नाइस सोसायटी के चेयरमैन डॉ. शोभित कुमार, समारोह अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र तथा विशिष्ट अतिथि पद्मश्री सेठ पाल सिंह ने मां सरस्वती और बाबू विजेंद्र कुमार की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

150 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 85 को पीएचडी की डिग्री

दीक्षांत समारोह में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले 150 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इनमें 100 छात्राएं और 50 छात्र शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 85 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी गई, जिनमें 53 छात्र और 32 छात्राएं शामिल हैं।

वहीं, 600 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 446 छात्र और 154 छात्राएं शामिल हैं। इस प्रकार समारोह में कुल 835 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक या विभिन्न शैक्षणिक उपाधियों से सम्मानित किया गया।

प्रोफेसर एम. मोनी को मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि

समारोह का प्रमुख आकर्षण प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर एम. मोनी को मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित करना रहा। उन्हें राष्ट्रीय सूचना विज्ञान, ई-गवर्नेंस, कृषि विकास, शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण और ग्रामीण समुदायों के लिए किए गए विशिष्ट योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. शोभित कुमार ने उन्हें मानद उपाधि प्रदान की।

ज्ञान और नैतिक मूल्यों के साथ राष्ट्रनिर्माण में योगदान दें युवा

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) बूटा सिंह सिद्धू ने स्वागत संबोधन के दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत, लगन और अनुशासन का उत्सव है। विद्यार्थियों को ज्ञान, नैतिक मूल्यों और संवेदनशीलता के साथ समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने पहले ही चक्र में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से ए ग्रेड प्राप्त किया है।

विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा निःशुल्क नेत्र जांच शिविरों के माध्यम से 1,000 नेत्र ऑपरेशन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति में संस्थापक अध्यक्ष, कुलाधिपति, शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रबंधन के सामूहिक योगदान की सराहना की। इसके बाद उन्होंने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दीक्षा की शपथ दिलाई।

ईमानदारी और निष्ठा से करें कार्य: पद्मश्री सेठ पाल सिंह

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री सेठ पाल सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में वे जिस भी कार्यक्षेत्र का चयन करें, उसमें ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ काम करें। सफलता का अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान देना भी है।

उन्होंने कहा कि किसान समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, ग्रामीण विकास और रोजगार जैसी चुनौतियों के समाधान में युवा अपनी शिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. शोभित कुमार ने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कुलाधिपति ने शिक्षा और सामाजिक प्रतिबद्धता को बताया प्रगति का आधार

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र ने मुख्य अतिथि डॉ. शोभित कुमार और विशिष्ट अतिथि पद्मश्री सेठ पाल सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. शोभित कुमार को अपना मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व, शिक्षा के प्रति समर्पण, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रनिर्माण की भावना ने विश्वविद्यालय को निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाया है।

उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। समारोह के दौरान मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को विश्वविद्यालय की ओर से स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

कई गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में शोभित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मेरठ के कुलपति प्रो. (डॉ.) वीके त्यागी, श्री नरेश बंसल, डॉ. राजीव लोचन बिश्नोई, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार गोयल, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. देवेंद्र नारायण, प्रो. (डॉ.) रणजीत सिंह, सूफी जहीर अख्तर, वासु शोभित, अभिनव शोभित, वंशिका शेखर और वंश शेखर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह का संचालन डॉ. गरिमा वर्मा ने किया। अंत में कुलसचिव प्रो. (डॉ.) महिपाल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ हुआ।

 

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