सहारनपुर में सातवें दिन भी जारी रहा आशाओं का धरना, 30 हजार मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
सीएमओ कार्यालय पर आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका; संयुक्त आशा संगठन ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान
सहारनपुर, 14 अक्टूबर। निर्धारित मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आंदोलन के सातवें दिन भी आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संयुक्त आशा संगठन के संयोजक संजय वालिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग
धरने को संबोधित करते हुए संयुक्त आशा संगठन के संयोजक संजय वालिया ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से आशा कार्यकर्ताओं के लिए 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की। इसके अलावा प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों के स्थानांतरण तथा जिला स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं के कथित शोषण पर रोक लगाने की भी मांग उठाई।
सात दिन से कार्य बहिष्कार, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका
आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार, पिछले सात दिनों से आंदोलन जारी है, लेकिन शासन की ओर से अब तक कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला है। इसी के चलते कार्यकर्ताओं में नाराजगी बनी हुई है।
लगातार कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अडिग हैं और उनका कहना है कि सरकार को उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए, ताकि आंदोलन समाप्त हो सके और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हों।
मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
धरने के दौरान जिलाध्यक्ष कमलेश सैनी, लालतेश, मिथिलेश और नेहा सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के अधिकारों और हितों के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
प्रदर्शन में लता, भावना, पूनम देवपुरा, सुदेश संगाथेड़ा, ममता भनैड़ा, पिंकी मोहरा, सुनीता, बोबी, प्रवीन, रविता, कविता, सीमा, ओमलता, मोनिका, राजकी देवी, प्रीति शर्मा, रीना, काजल, उर्मिला, गीता, मीनाक्षी महेश्वरी, दीपमाला, सुषमा, सोनिया, बबीता, शारदा, सरिता, रेखा, उषा, सविता, सुलेखा, संगीता, प्रेमा, राधा, विमला, नीलम, अर्चना, निशा, रुकसाना, राजवती, मीरा, राखी, पूजा, शीतल, दीपा और सूरजला समेत बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
