सहारनपुर में पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, लगेगा पांच हजार रुपये तक जुर्माना
गांव से लेकर जिला स्तर तक निगरानी समितियां गठित, फसल अवशेष जलाने वालों पर होगी कार्रवाई
सहारनपुर, 28 अक्टूबर। जनपद में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। खेतों में फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है। घटनाओं की निगरानी के लिए ग्राम पंचायत, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर समितियां गठित की गई हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में पराली जलाने की गतिविधियों पर नजर रखेंगी।
जिला कृषि अधिकारी कपिल कुमार मावी ने बताया कि धान की कटाई के बाद अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करने की जल्दबाजी में कुछ किसान पराली जला देते हैं। इससे न केवल वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
निगरानी के साथ किसानों को किया जाएगा जागरूक
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से खेत बचाओ अभियान, प्रचार-प्रसार और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर खेतों में पराली जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में पांच हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। फसल अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी।
