संस्कृति और संस्कारों से ही होता है श्रेष्ठ चरित्र निर्माण: कुलदीप

संस्कृति और संस्कारों से ही होता है श्रेष्ठ चरित्र निर्माण: कुलदीप
सहारनपुर में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिल्ली से आए कलाकार प्रस्तुति देते हुए एवं समारोह को संबोधित करते महापौर डॉ. अजय कुमार।

मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में ‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’ ने बांधा समां

सहारनपुर। मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नगर निगम द्वारा जीआईसी सभागार में स्पिक मैके एवं स्पर्श प्रयास के सहयोग से ‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत, वाद्य यंत्रों और कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बाल कलाकारों की प्रतिभा को देखकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक कुलदीप कुमार, नगर विधायक राजीव गुंबर, भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन एवं हेमंत अरोड़ा, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष केएल अरोड़ा, दल नेता राजेंद्र कोहली, उपसभापति मयंक गर्ग, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, कार्यक्रम संयोजक मनोज प्रजापति, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, सहसंयोजक ज्योति अग्रवाल, सीमा कात्यायनी और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री नूतन शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं रिबन काटकर किया।

बाल संगीतकारों की प्रस्तुति ने जीता दिल

स्पर्श के तत्वावधान और पंकज मल्होत्रा के निर्देशन में पांच से 12 वर्ष तक के बाल संगीतकारों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर सामूहिक प्रस्तुति दी। बच्चों की प्रस्तुति शुरू होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध राग किरवानी की शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में यह भी दिखाया गया कि वर्ष 1950 से 2026 तक विभिन्न फिल्मी गीतों में राग किरवानी का किस प्रकार प्रयोग किया गया है।

सरोद पर रुद्र, अथर्व, अवंतिका, सिदक, गर्व और परीशा, सितार पर कवनप्रीत एवं अनन्या, इसराज पर अमान्या एवं शुभ, संतूर पर अपूर्वा एवं मनका तथा बांसुरी पर दैविक, गर्वित एवं शुभ ने राग किरवानी की पारंपरिक गत में तानों को पिरोते हुए झाला की मनमोहक प्रस्तुति दी।

कथक की प्रस्तुति ने मोहा मन

कार्यक्रम में दिल्ली से आईं गुरु मालती श्याम (लखनऊ घराना) के दल ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। दल में शामिल अश्विनी सोनी, गौरी, हर्षिता, बादल, हर्षिता शर्मा, डोल्मा गुप्ता और हर्षिता द्विवेदी ने कृष्ण प्रसंग पर आधारित नृत्य और तराना प्रस्तुत किया। कलाकारों की एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

संस्कृति और संस्कारों को साथ लेकर चलना जरूरी: कुलदीप

आरएसएस के विभाग प्रचारक कुलदीप कुमार ने कहा कि संगीत और भारतीय वाद्य यंत्र हमारी संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि आज हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को कहीं न कहीं भूलते जा रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को साथ लेकर आगे बढ़ें। इन्हीं मूल्यों के आधार पर श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण संभव है।

संगीत और नृत्य हमारी विरासत: महापौर

महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि कोई भी वाद्य यंत्र हमारी संस्कृति, विरासत और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संगीत और नृत्य की जड़ें मंदिरों से जुड़ी रही हैं, जिन्हें बाद में दरबारों की रौनक बनाया गया।

महापौर ने बाल संगीतकारों से एक-एक कर परिचय लिया और उनकी कला की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये बच्चे केवल संगीत की प्रस्तुति नहीं दे रहे, बल्कि अपनी संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए साधना कर रहे हैं। उन्होंने स्पिक मैके और स्पर्श के संचालक पंकज मल्होत्रा एवं शैफाली के प्रयासों की भी सराहना की।

इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक मनोज प्रजापति ने पार्षद दीपक रहेजा, सुलेख चंद, अरुण गुप्ता, अनुज जैन, सूपिन पाल, नीरज शर्मा, मुरारी खेतवाल, राहुल झाम, जसबीर मोघा, पार्षद प्रतिनिधि नितिन जाटव, राकेश कल्याण, नीरज दिवाकर, अक्षु छाबड़ा, अनिल शर्मा सहित अन्य अतिथियों का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इस अवसर पर राजकुमार मक्कड़, जोगेंद्र लाला, सन्नी सेठी, पूर्व पार्षद मनोज जैन एवं मानसिंह जैन, सुशील प्रजापति, अजय सिंघल (उड़ान), ललित कटारिया, शीतल टंडन, मनीष अरोड़ा, सूर्य प्रताप राणा और विवेक मनोचा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं दर्शक मौजूद रहे।

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