वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए झूठी शिकायत की तो होगी कार्रवाई, निर्वाचन आयोग की नागरिकों को चेतावनी
फार्म-7 में गलत जानकारी देने पर एक साल तक की जेल या जुर्माना, प्रशासन ने कहा- शिकायत मिलते ही मतदाता का नाम नहीं कटेगा
सहारनपुर। निर्वाचक नामावली की शुद्धता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से वोटर लिस्ट से संबंधित आवेदन करते समय सही और प्रमाणिक जानकारी देने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फार्म-7 के माध्यम से किसी मतदाता का नाम हटाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए जानबूझकर झूठी घोषणा करना दंडनीय अपराध है। ऐसा पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद कुमार चौहान के निर्देश पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी लवी त्रिपाठी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि निर्वाचक नामावली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन कराया जा रहा है। फार्म-7 के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और निस्तारण किया जाएगा।
क्या है फार्म-7 और कब किया जाता है इस्तेमाल?
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि फार्म-7 का इस्तेमाल निर्वाचक नामावली में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने, किसी मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने अथवा निर्धारित आधारों पर स्वयं का नाम हटवाने के लिए किया जाता है। ऐसे आवेदन में संबंधित व्यक्ति का विवरण, आपत्ति या नाम हटाने का कारण और निर्धारित घोषणा देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आवेदन में दी गई जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करना आवेदक की जिम्मेदारी है। इसलिए नागरिक किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी देने से बचें।
झूठी घोषणा पर एक साल तक की जेल का प्रावधान
लवी त्रिपाठी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण या संशोधन के संबंध में जानबूझकर झूठा लिखित बयान या घोषणा करना दंडनीय अपराध है। इस अपराध में दोषसिद्ध होने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फार्म-7 के जरिए प्राप्त प्रत्येक आवेदन की संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी। इस दौरान उपलब्ध अभिलेखों, साक्ष्यों और आवेदन में दर्ज तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जानबूझकर झूठी या भ्रामक घोषणा किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत मिलते ही नहीं कटेगा किसी मतदाता का नाम
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल आवेदन प्राप्त होने या किसी व्यक्ति द्वारा आपत्ति दर्ज कराने से संबंधित मतदाता का नाम स्वतः निर्वाचक नामावली से नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक मामले में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार जांच के बाद ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचक नामावली में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे और किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से न हटाया जाए।
नागरिकों से सही जानकारी देने की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि निर्वाचक नामावली से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करते समय सही, प्रमाणिक और तथ्यपरक जानकारी दें। जानबूझकर गलत घोषणा करने से बचें और मतदाता सूची को पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाने में प्रशासन का सहयोग करें।
