परिसीमन बिल पर सियासी घमासान तेज, जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर पलटवार; BJP से पूछे तीन बड़े सवाल

परिसीमन बिल पर सियासी घमासान तेज, जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर पलटवार; BJP से पूछे तीन बड़े सवाल

नई दिल्ली। संसद में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी तकरार थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के पत्र पर पलटवार करते हुए मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से तीन महत्वपूर्ण सवाल पूछते हुए परिसीमन के मुद्दे पर पारदर्शिता और सर्वदलीय चर्चा की मांग की है।

खरगे के पत्र पर रिजिजू के जवाब से बढ़ा विवाद

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन के मुद्दे पर पत्र लिखा था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अक्टूबर को पत्र भेजा।

रमेश के मुताबिक, रिजिजू ने अपने जवाब में मार्च 2026 के दौरान परिसीमन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा कुछ राजनीतिक दलों के साथ की गई चुनिंदा चर्चाओं का उल्लेख किया है। हालांकि, उन्होंने उन चर्चाओं के दौरान किए गए वादों और बाद में पेश किए गए विधेयक के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाया।

गृह मंत्री के वादों को विधेयक में शामिल नहीं करने का आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मार्च में राजनीतिक दलों के साथ हुई बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने जो आश्वासन दिए थे, उन्हें 16 अप्रैल 2026 को पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख किरेन रिजिजू के जवाब में नहीं किया गया। कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि उक्त विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में निर्णायक रूप से खारिज हो गया था।

जयराम रमेश ने भाजपा से पूछे ये तीन सवाल

परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने तीन सवालों के जवाब मांगे हैं।

  1. नया प्रस्ताव क्या है? क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन को लेकर कोई ठोस नया प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी राजनीतिक दल के साथ चर्चा की हो?
  2. सर्वदलीय बैठक से परहेज क्यों? सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, अपने नए प्रस्ताव को पारदर्शी तरीके से सामने रखने और सभी राजनीतिक दलों के विचार एक साझा मंच पर सुनने से लगातार इंकार क्यों कर रही है?
  3. क्या दोबारा आएगा खारिज विधेयक? क्या केंद्र सरकार की मंशा उसी संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा संसद में पेश करने की है, जिसे पहले ही लोकसभा खारिज कर चुकी है?

परिसीमन पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी खींचतान

कांग्रेस के इन सवालों के बाद परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति और पारदर्शी चर्चा की मांग कर रहा है।

जयराम रमेश के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार से केवल पत्राचार नहीं, बल्कि परिसीमन के प्रस्ताव और उसकी रूपरेखा को लेकर ठोस जवाब चाहती है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार कांग्रेस के इन तीन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की दिशा में कोई पहल होती है।

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