‘भारत पर क्यों भरोसा करें’, नॉर्वे की पत्रकार ने मानवाधिकारों से जुड़ा पूछा सवाल तो MEA ने दिया दो टूक जवाब
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे की यात्रा के दौरान ओस्लो में एक पत्रकार ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में विदेश मंत्रालय ने सोमवार को तुरंत उस पत्रकार को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया और कहा कि हमारा संविधान लोगों के अधिकारों की गारंटी देता है।
एक पत्रकार ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बार-बार यह जवाब मांगा कि ‘भारत पर भरोसा क्यों किया जाना चाहिए’। इसके चलते विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और नॉर्वे के एक पत्रकार के बीच तीखी बहस हो गई।
सिबी जॉर्ज ने की पत्रकार की बोलती बंद
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है और अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में कानूनी उपचार भी देता है। भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश ने आजादी के समय से ही महिलाओं के लिए समान मतदान अधिकारों को सुनिश्चित किया है।
जॉर्ज ने आगे कहा कि भारत समानता और मानवाधिकारों में विश्वास रखता है और यह भी कहा कि वोट देने तथा सरकारें बदलने का अधिकार लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का सबसे सशक्त उदाहरण है।
सिबी जॉर्ज ने क्या कहा?
सिबी जॉर्ज ने कहा, “हमारा एक संविधान है जो लोगों के अधिकारों की, लोगों के मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। जैसा कि आप जानते हैं हमारे देश की महिलाओं के लिए हमारे पास समान अधिकार हैं, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है। 1947 में हमने अपनी महिलाओं को वोट देने की आजादी दी। हमने मिलकर आजादी हासिल की और उन्होंने भी इसे खुद जीता।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं कई ऐसे देशों के बारे में जानता हूं, जहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार भारत द्वारा यह आजादी दिए जाने के कई दशकों बाद मिला। आप जानते हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि हम समानता में विश्वास रखते हैं, हम मानवाधिकारों में विश्वास रखते हैं। और मानवाधिकारों का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है? सरकार बदलने का अधिकार, वोट देने का अधिकार। और भारत में यही हो रहा है। हमें इस बात पर बहुत गर्व है।”
सवाल का जवाब देते हुए जॉर्ज ने बार-बार अनुरोध किया कि जब वे जवाब दे रहे हों तो उन्हें बीच में न टोका जाए और कहा, “मुझे सवाल का जवाब देने दीजिए, कृपया मुझे बीच में न टोकें। आपने एक सवाल पूछा है यह मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है। आपने पूछा कि किसी देश को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए तो मुझे उस सवाल का जवाब देने दीजिए।”
भारतीय मीडिया के बारे में क्या कहा?
भारत के मीडिया परिदृश्य के पैमाने और विविधता का जिक्र करते हुए जॉर्ज ने कहा कि देश में एक जीवंत और बेहद सक्रिय प्रेस इकोसिस्टम है, जो कई भाषाओं में काम करता है।
इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के पैमाने और विविधता को अक्सर गलत समझा जाता है, उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि यहां कितनी कहानियां चल रही होती हैं। हर शाम हमारे पास कितनी ब्रेकिंग न्यूज आती हैं। अकेले दिल्ली में ही कम से कम 200 टीवी चैनल हैं। अंग्रेजी में, हिंदी में और कई दूसरी भाषाओं में। लोगों को भारत के पैमाने की कोई समझ नहीं है। लोगों को इसकी कोई जानकारी ही नहीं है।”
‘भारत की यही साख है’
भारत द्वारा कानूनी मानदंडों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “भारत एक ऐसा देश है जो कानून के शासन में विश्वास रखता है। हम हमेशा नियमों का पालन करते आए हैं, चाहे वे कहीं भी हों। हम पूरी तरह से नियमों के अनुसार चलते हैं। यही भारत की साख है।”
दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए, इस सवाल के जवाब में सिबी जॉर्ज ने COVID-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों के दौरान देश की भूमिका का जिक्र किया और भारत की सभ्यतागत विरासत को रेखांकित किया। जॉर्ज ने गणित, संस्कृति और वैश्विक विरासत में भारत के योगदान का भी हवाला दिया।
उन्होंने कहा, “आप अपने आस-पास देखिए, आपको दुनिया में हर जगह भारत से जुड़ाव नजर आएगा। आपके फोन पर जो अंक (numbers) दिखाई देते हैं, वे भारत की ही देन हैं, उनकी शुरुआत भारत में ही हुई थी। ‘शून्य’ (Zero) की शुरुआत भारत में हुई थी। शतरंज की शुरुआत भारत में हुई थी। इसलिए, हमें अपनी इस सभ्यता पर गर्व है। योग, जिसकी आज पूरी दुनिया तारीफ करती है, उसकी शुरुआत भी भारत में ही हुई थी। भारत के पास महाकाव्य और किताबें थीं।”
