अघ्याना मे त्यागी बिरादरी नंही मनाती रक्षाबंधन का पर्व , सैंकडो वर्ष पूर्व हुए रक्तपात को मानते है कारण
नकुड 27 अगस्त इंद्रेश। रक्षाबंधन सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। जो पूरे देश मे उत्तर से दक्षिण व पूर्व से पश्चिम तक पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। परंतु ं नकुड तहसील क्षेत्र का एक गांव गांव ऐसा भी है , जंहा रक्षा बधन का पर्व नंही मनाया जाता।
रक्षा बधन पर बहने उत्साह के साथ अपने भाईयों के घर जाकर उनके हाथ पर रक्षा सुत्र बांधती है ओर भाई अपनी बहन से रक्षा सुत्र बधंवाकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते है। जिससे इस पर्व का महत्व बढ जाता है। देश की सीमाओ से लेकर पुरे देश मे इस उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंरतु सहारनपुर जनपद की नकुड तहसील के अघ्याना गांव की त्यागी बिरादरी मे रक्षा बंधन का पर्व नंही मनाया जाता ।
अघ्याना गावं तहसील मुख्यालय से मात्र तीन किमी दूर है। जो डामर की पक्की सडक से तहसील मुख्यालय से जुडा है। या यह कहें कि तहसील मुख्यालय तक तो इसगांव के खेत है। त्यागी बहुल यह गांव दुसरे गांवो जैसा ही है। पंरतु अघ्याना की एक प्रथा इसे अन्य गांवो से अलग करती है। ओर वह है कि इस गांव में त्यागी समाज मे रक्षा बंधन के पर्व का न मनाया जाना। ग्रामीणो का कहना है कि सैंकडों वर्षो से गांव का त्यागी समाज रक्षां बंधन का पर्व नंही मनाता ।
माना जाता है कि रक्षा बंधन पर गांव मे हुआ था बडा रक्तपात
ग्रामीणों का कहना है कि हांलाकि गांव मे सैंकडो वर्षो से रक्षाबध्ंान का पर्व नंही मनाया जाता । पंरतु गांव मे रक्षा बंधन क्यों नंही मनाया जाता इस सवाल का कोई सटीक उत्तर नंही है। अघ्याना निवासी मा0 कृष्णदत्त त्यागी व विश्वास त्यागी का कहना है कि किदवंती है कि शुरू मे यंहा भी त्यागी व ब्राहमण समाज रक्षा बंधन मनाता था, पंरतु सैंकडो वर्ष पूर्व रक्षाबंधन के दिन ही किसी अन्य गांव के व्यक्तियो ने यहां हमला बोल दिया। जिससे गांव मे बडा रक्तपात हुआ। कई लोग मारे गये। जिससे पूरे गांव मे रक्षाबंधन का पर्व नंही मनाया गया। यह दिन एक तरह से यंहा अभिशिप्त माना जाने लगा।
इसके बाद हर वर्ष रक्षा बंधन को उसी घटना से जोडकर देखा जाने लगा । गांव मे त्यागी व ब्राहमण समाज मे रक्षाबंधन न मनाने की एक प्रथा बन गयी। हांलाकि दूसरी बिरादरियो के लोग रक्षा बंधन मनाते हैं । ग्रामीणो का कहना है कि त्यागी व ब्राहमण समाज के लोग यंहा के मूल निवासी है। जबकि दुसरी बिरादरी के लोग दुसरे स्थानो से आकर यंहा बसे है। इसलिये वे रक्षा बंधन मनाते है। पंरतु त्यागी बिरादरी के लोग अपनी पूरानी प्रथा का अक्षरसः पालकर करते हैं । सैंकडो वर्षो के बडे अंतराल के बाद भी त्यागी बिरादरी के लोग रक्षाबंधन नंही मनाते। गांव की यह अघ्याना को प्रथा उसे अन्य स्थानो से अलग करती है।
