मेला गुघाल में दिखा परंपरागत भारतीय खेलों का रोमांच, 750 से अधिक बच्चों ने लिया हिस्सा
बोरी कूद, मटका संतुलन दौड़ और साइकिल टायर रेस बनीं आकर्षण का केंद्र, कुलपति प्रो. विमला वाई बोलीं- बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी हैं पारंपरिक खेल
सहारनपुर। आधुनिक दौर में मोबाइल और डिजिटल गेम्स के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपरागत खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से मेला गुघाल में अनूठी पहल की गई। नगर निगम के तत्वावधान में पार्षद गौरव कपिल के संयोजन में जेवी जैन डिग्री कॉलेज में आयोजित परंपरागत भारतीय खेल प्रतियोगिताओं में जिलेभर के विभिन्न विद्यालयों से आए 750 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। बोरी कूद, मटका संतुलन दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और साइकिल टायर रेस जैसी प्रतियोगिताओं ने बच्चों के साथ दर्शकों को भी रोमांचित कर दिया।
परंपरागत खेल बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक: प्रो. विमला वाई
कार्यक्रम का शुभारंभ मां शाकंभरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला वाई और डॉ. वकुल बंसल ने पवनपुत्र हनुमान जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा रिबन की गांठ खोलकर किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. विमला वाई ने नगर निगम की पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के बदलते परिवेश में भारतीय परंपरागत खेलों को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। ये खेल न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों में आपसी सहयोग, अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि इन खेलों को देखकर उनके अपने बचपन की यादें भी ताजा हो गईं। कुलपति ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी नगर निगम के ऐसे सार्थक प्रयासों से जुड़ने की इच्छा जताई।
पहली बार मेला गुघाल में शामिल हुए पारंपरिक भारतीय खेल
मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में पहली बार कबड्डी, खो-खो, बोरी कूद, रस्साकसी, साइकिल टायर दौड़, मटका संतुलन दौड़ और दृष्टिबाधित मटकी भेदन जैसी प्रतियोगिताओं को शामिल किया गया।
देर शाम तक चली प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। विशेष रूप से बोरी कूद, मटका संतुलन दौड़, साइकिल टायर रेस और रस्साकसी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
बोरी कूद में सलोनी, अंजलि और साक्षी ने मारी बाजी
बोरी कूद प्रतियोगिता के कक्षा पांच से नौ वर्ग में सलोनी ने प्रथम, विनी ने द्वितीय और खुशनुमा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कक्षा दस से बारह वर्ग में अंजलि प्रथम, सानिया द्वितीय और पल्लवी तृतीय स्थान पर रहीं।
स्नातक वर्ग में साक्षी ने पहला, सिमरन ने दूसरा और अनम ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, मटका संतुलन दौड़ के कक्षा पांच से नौ वर्ग में पल्लवी ने प्रथम, तनीषा ने द्वितीय और रिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
मोबाइल की दुनिया से निकालकर बच्चों को बचपन लौटाने का प्रयास: गौरव कपिल
कार्यक्रम संयोजक एवं पार्षद गौरव कपिल ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल और डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते चलन के कारण बच्चे अपने परंपरागत खेलों से दूर होते जा रहे हैं। नगर निगम ने इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को उनके बचपन और भारतीय खेल संस्कृति से दोबारा जोड़ने का प्रयास किया है।
उन्होंने मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय खेलों को शामिल करने के लिए महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह और नगरायुक्त शिपू गिरि का आभार व्यक्त किया। साथ ही आयोजन में सहयोग के लिए क्रीड़ा भारती और जेवी जैन डिग्री कॉलेज को धन्यवाद दिया।
अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान संयोजक गौरव कपिल ने कुलपति प्रो. विमला वाई, डॉ. वकुल बंसल, उपसभापति मयंक गर्ग, मेला संयोजक संजय सैनी, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, क्रीड़ा भारती के महानगर अध्यक्ष अशोक गुप्ता, पार्षद संजय गर्ग, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, पार्षद सुनील पंवार, पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिव कुमार राणा, समाजसेवी योगेश दहिया, क्रीड़ा भारती के जिला मंत्री अनुज वीर, अशोक सक्सेना, रामकुमार सिंह, संजीव सीकरी, कमल गर्ग और ललित कटारिया सहित अतिथियों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
इस अवसर पर डॉ. संदीप गुप्ता, गौरव चौहान, मनीष कुमार, कोच लाल धर्मेंद्र प्रताप, भूपेंद्र, मुस्तकीम, निशु राणा, सरिता और रवि कोरी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
