सेवा ही हमारा मुख्य कार्य, ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी सेवा भाव से पीछे नहीं हटेंगे: प्रधानमंत्री मोदी
सेवा संकल्प अभियान के सेवा यात्रियों से प्रधानमंत्री मोदी ने की बातचीत, कहा- उपदेश नहीं, अपने काम से दें सेवा का संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (24 सितंबर) को सेवा संकल्प अभियान के सेवा यात्रियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सेवा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सेवा ही हमारा मुख्य कार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा का संदेश केवल भाषण या उपदेश देकर नहीं, बल्कि खुद सेवा करके दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से बातचीत के दौरान कहा कि व्यक्ति जीवन में चाहे कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाए, उसे अपने भीतर के सेवा भाव को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक शक्ति या ऊंचा पद मिलने के बावजूद सेवा का रास्ता ही आगे बढ़ने का आधार होना चाहिए।
‘सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों को सेवा का संदेश देने का सबसे प्रभावी तरीका खुद सेवा करना है। उन्होंने कहा कि हमारे व्यवहार और कार्यों से लोगों को यह दिखाई देना चाहिए कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी बदल जाएं, सेवा का भाव कायम रहेगा।
उन्होंने कहा कि सेवा केवल कहने या समझाने का विषय नहीं है, बल्कि इसे अपने आचरण में उतारने की जरूरत है। पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों से अपील की कि वे अपने काम के साथ-साथ अपना भी ध्यान रखें और समाज की सेवा के इस रास्ते से कभी पीछे न हटें।
सेवा यात्रियों को प्रणाम कर बोले- आधा पुण्य चुरा रहा हूं
सेवा यात्रियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति यात्रा करके वापस आता है और लोग उसे प्रणाम करते हैं तो मान्यता है कि यात्रा का आधा पुण्य प्रणाम करने वाले को भी मिलता है।
प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में कहा, “आज मैं भी सभी सेवा यात्रियों को प्रणाम करके आपका आधा पुण्य चुरा रहा हूं।” उन्होंने सेवा यात्रियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके समर्पण को नमन किया।
‘सेवा परमो धर्म:’ के सिद्धांत पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को लगातार सेवा के मूल भाव से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, सेवा का रास्ता नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसे ‘सेवा परमो धर्म:’ के सिद्धांत को मानते हुए आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से भी इसी भावना को अपने कार्यों में बनाए रखने की अपील की।
पौधारोपण को लेकर पीएम मोदी ने दिया आसान सुझाव
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण का भी जिक्र किया। उन्होंने पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल के लिए पानी बचाने का एक तरीका बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि पौधा लगाते समय उसके पास पानी से भरा मिट्टी का घड़ा रखा जा सकता है, जिसका मुंह ऊपर की ओर हो। उन्होंने सुझाव दिया कि महीने में एक बार उस घड़े में पानी भरने से पौधे को धीरे-धीरे पानी मिलता रहेगा।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस तरीके से पानी की बचत के साथ-साथ अधिक संख्या में लगाए गए पौधों को बढ़ने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सेवा यात्रियों को पर्यावरण संरक्षण को भी सेवा के कार्य से जोड़ने का संदेश दिया।
गुजरात समेत कई राज्यों के सेवा यात्रियों से संवाद
प्रधानमंत्री ने गुजरात के साथ-साथ अन्य राज्यों से जुड़े सेवा यात्रियों से भी बातचीत की और उन्हें सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज के लिए किए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयास भी व्यापक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से कहा कि सेवा को केवल किसी अभियान या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने इस दौरान सेवा, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कई पहलुओं पर अपनी बात रखी।
