शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के यूजीसी-एमएमटीटीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एनईपी कार्यक्रम के प्रतिभागियों को मिले प्रमाण-पत्र

शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के यूजीसी-एमएमटीटीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एनईपी कार्यक्रम के प्रतिभागियों को मिले प्रमाण-पत्र

गंगोह । शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह, सहारनपुर एवं यूजीसी-एमएमटीटीसी (पूर्व में GAD-TLC), एस.जी.टी.बी. खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 21 से 30 मई 2026 तक आयोजित 10 दिवसीय “एनईपी ओरिएंटेशन एंड सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम” के सफल आयोजन के उपरांत प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं अकादमिक सहयोग के लिए सहयोगी विश्वविद्यालय के रूप में सर्टिफिकेट ऑफ़ एप्प्रेसिअशन जारी किया गया। साथ ही कार्यक्रम के सफल समन्वयन एवं आयोजन के उपरांत प्रतिभागियों के लिए आधिकारिक प्रमाण-पत्र भी जारी किए गए।

कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए आईक्यूएसी निदेशक डॉ. सोमप्रभ दुबे एवं सहायक कुलसचिव श्री शुभानिक साहा को आयोजन समन्वयक के रूप में प्रमाण-पत्र जारी किए गए। दोनों अधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन, प्रतिभागियों के पंजीकरण, समन्वयन, तकनीकी व्यवस्था एवं प्रमाण-पत्र वितरण की प्रक्रिया का प्रभावी संचालन किया।

यह 10 दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम) नई शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों जैसे समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, अकादमिक नेतृत्व, अनुसंधान एवं विकास, समावेशी शिक्षा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा पाठ्यक्रम विकास एवं मूल्यांकन पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में देशभर के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह ने इस सफल आयोजन के माध्यम से उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन, संकाय विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के कुलपति प्रो.(डॉ.) बी.एस. सिद्धू ने एनईपी उन्मुखीकरण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगी संस्थानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अकादमिक कार्यक्रम शिक्षकों एवं शोधार्थियों के ज्ञान, कौशल एवं नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।