‘इस बेकार सॉफ्टवेयर को हटाएं’, ECINet एप को लेकर शशि थरूर ने की चुनाव आयोग से मांग
चुनाव आयोग से ECINet वापस लेने की मांग, गोवा में मतदाता सूची से जुड़े मामले का दिया हवाला
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और ECINet सॉफ्टवेयर पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। थरूर ने कहा कि आयोग को प्रभावित नागरिकों और देश से माफी मांगनी चाहिए तथा इस सॉफ्टवेयर को हटाकर उससे हुए कथित नुकसान को ठीक करना चाहिए।
थरूर की यह प्रतिक्रिया गोवा में मतदाता सूची से जुड़े एक मामले की रिपोर्ट सामने आने के बाद आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां कुछ मतदाताओं के नाम हटाने के फैसले की समीक्षा के बाद स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने उन्हें मतदाता सूची में बनाए रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन ECINet में आवश्यक बदलाव करने की अनुमति राज्य स्तर पर उपलब्ध नहीं थी।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के चुनाव अधिकारियों ने 97 मतदाताओं के मामलों की जांच की थी। अधिकारियों ने कथित तौर पर इन मतदाताओं को मतदाता सूची में बनाए रखने योग्य पाया और पहले हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करना चाही।
हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया कि ECINet में बदलाव करने का नियंत्रण दिल्ली स्थित केंद्रीय स्तर पर था, जिसके कारण स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को खुद बदलाव करने में परेशानी हुई।
इस मामले का महत्व इसलिए भी बताया गया है क्योंकि गोवा में मतदाता सूची में नाम कुछ राज्य कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता से भी जुड़ा है। रिपोर्ट में गोवा मेडिक्लेम योजना का उदाहरण दिया गया है, जिसके तहत कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा मिलती है।
शशि थरूर ने ECINet हटाने की मांग की
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि मामला केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नागरिकों के संवैधानिक अधिकार और जरूरी मानवीय सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।
थरूर ने चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने और ECINet को वापस लेने की मांग की। उन्होंने आयोग से प्रभावित नागरिकों से माफी मांगने की भी अपील की।
ECINet क्या है?
ECINet चुनाव आयोग का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे 2026 में लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य चुनाव से जुड़े अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन को एक जगह लाना है। चुनाव आयोग के मुताबिक, ECINet में 40 से अधिक मौजूदा एप और डिजिटल सेवाओं को एकीकृत किया गया है।
आयोग ने इसे मतदाताओं, चुनाव अधिकारियों, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों के लिए एक साझा डिजिटल इंटरफेस के तौर पर विकसित किया है। आयोग का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट व्यवस्था लागू हैं।
चुनाव आयोग ने आलोचनाओं पर क्या कहा?
ECINet को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि ECINet समेत उसके डिजिटल सिस्टम में अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं।
आयोग ने यह भी कहा है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी कानून के तहत अपने वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं। आयोग ने हालिया विवादों के बीच आंतरिक मतभेदों की खबरों पर भी कहा है कि किसी संस्था में अलग-अलग राय और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
SIR को लेकर पहले से चल रही है बहस
ECINet को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देश के कई हिस्सों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। ECINet में ERONET जैसे चुनावी डेटाबेस और प्रक्रियाओं को एकीकृत किया गया है।
वहीं, दो चुनाव आयुक्तों की ओर से ECINet और चुनावी डेटाबेस के नियंत्रण के केंद्रीकरण को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। चुनाव आयोग ने हालांकि अपने फैसलों को कानूनी और प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।
अब ECINet को लेकर शशि थरूर की मांग के बाद चुनाव आयोग की डिजिटल व्यवस्था और मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
