राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर लगी मुहर

राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर लगी मुहर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उसका पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का CEO नियुक्त करने के फैसले पर मुहर लग गई है। नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए जाने की संभावना है।

जितेंद्र मिश्रा अपनी नियुक्ति की तारीख से तीन साल तक CEO के पद पर रहेंगे। वह इसी साल अप्रैल में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने करीब 38 वर्षों तक वायुसेना में सेवा दी। इस दौरान वह फाइटर पायलट, कॉम्बैट इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

ऑपरेशन सिंदूर और कारगिल में निभाई अहम भूमिका

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। वह 1999 के कारगिल युद्ध के साथ-साथ पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। उन्हें देश की सर्वोच्च युद्ध सेवा संबंधी सैन्य सम्मानों में से एक उत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले मिश्रा NDA खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।

5,500 से ज्यादा आवेदन, 18 नाम शॉर्टलिस्ट

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। सूत्रों के मुताबिक, 5,500 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों से खान-पान, रहन-सहन और हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं समेत कई अहम मुद्दों पर सवाल पूछे गए।

CEO के चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल थे।

क्या होगी CEO की जिम्मेदारी?

राम मंदिर के CEO की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी प्रबंधन को व्यवस्थित करना होगी। इसके अलावा मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, कर्मचारियों के संचालन, श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं और ट्रस्ट की प्रशासनिक गतिविधियों के समन्वय में भी CEO की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

चढ़ावे की चोरी के बाद तेज हुई बदलाव की मांग

दरअसल, इसी साल जून-जुलाई के दौरान राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया था। मामले में पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की मांग उठी। इसी दौरान ट्रस्ट से अनिल मिश्रा और चंपत राय की विदाई भी हुई।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा लंबे समय से मंदिर प्रशासन के लिए CEO की नियुक्ति की जरूरत पर जोर देते रहे थे। हालांकि, ट्रस्ट के भीतर कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया था। उनका तर्क था कि मंदिर का संचालन संतों के हाथों में ही रहना चाहिए।

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