नेपाल की तबाही के बीच दूतावास पहुंचे राजनाथ सिंह, बोले- ‘सुख-दुख के साथी के रूप में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा’
नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई भारी तबाही के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास पहुंचकर आपदा में प्रभावित लोगों के प्रति भारत की एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने नेपाल को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में भारत हर संभव मदद जारी रखेगा।
नेपाल दूतावास की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने दूतावास की शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
राजनाथ सिंह ने भारत और नेपाल को करीबी दोस्त और साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देश सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
‘मुश्किल वक्त में नेपाली भाई-बहनों के साथ खड़ा है भारत’
शोक पुस्तिका में अपने संदेश में रक्षा मंत्री ने कहा कि एक करीबी मित्र, साझेदार और ‘सुख-दुख के साथी’ के रूप में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भी भारत अपने नेपाली भाई-बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और नेपाल के खोज, बचाव और पुनर्वास अभियानों में हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनाथ सिंह का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब नेपाल अचानक आई बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है। आपदा में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है और कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।
903 लोगों की मौत, 4,247 लोग अब भी लापता
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ और संबंधित घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। करीब 4,247 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि राहत एवं बचाव एजेंसियों ने अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित बचाया है।
तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बचाव अभियान लगातार जारी है। अभियान के दौरान राहतकर्मियों को कीचड़, तेज बहाव वाली नदियों और बाढ़ के कारण बनी नई झीलों से जुड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत ने भेजी 11 टन राहत सामग्री
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच भारत लगातार मानवीय सहायता पहुंचा रहा है। 30 अगस्त को भारत ने नेपाल के लिए चौथी राहत उड़ान भेजी, जिसमें करीब 11 टन राहत सामग्री शामिल थी।
इस राहत सामग्री में खोज और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरण, टनल टेक्निकल टीम और DNA जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम शामिल थी। इसके अलावा कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट भी भेजे गए।
भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री नेपाली अधिकारियों को सौंप दी गई, ताकि इसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा सके।
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बीच प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में भारत की मानवीय सहायता दोनों देशों की साझेदारी और पड़ोसी सहयोग को भी रेखांकित करती है।
