‘भारतीय रेलवे पर गर्व है’, सोनम वांगचुक ने की वंदे भारत और चिनाब ब्रिज की सराहना; सरकार से की यह अपील
नई दिल्ली। प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भारतीय रेलवे की प्रशंसा करते हुए कहा है कि उन्हें देश की रेल व्यवस्था पर गर्व है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह रेलवे और परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयास हो रहे हैं, उसी तरह सरकार अपने वादों को भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाएगी।
सोनम वांगचुक ने गुरुवार (30 जुलाई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह यात्रा के दौरान अपने अनुभव साझा करते नजर आए। उन्होंने बताया कि वह लद्दाख लौट रहे हैं और इस दौरान उन्होंने पहली बार दिल्ली से श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में सफर किया।
वांगचुक ने कहा कि वह चिनाब नदी पर बने विश्व प्रसिद्ध रेल पुल को देखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने अपने सफर को बेहद शानदार बताते हुए कहा, “मुझे भारतीय रेलवे पर गर्व है। यात्रा का अनुभव बहुत अच्छा रहा और देश में बुनियादी ढांचे के विकास को देखकर खुशी हुई।”
शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े सुधार की जरूरत
सोनम वांगचुक ने परीक्षा सुधारों को लेकर संसद में लाए गए विधेयक का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सुधार केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनके अनुसार देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और दीर्घकालिक बदलाव की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को बेहतर अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
छात्रों के साथ किए गए वादे निभाने की अपील
वांगचुक ने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के संबंध में किए गए आश्वासनों का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि पहले उनके साथ और बाद में सीजेपी नेताओं के साथ हुए समझौतों में यह बात कही गई थी कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं होगी। सरकार को इस वादे पर कायम रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, विशेषकर छात्रों, के बीच भरोसे का माहौल बनाना बेहद जरूरी है। यदि सरकार और युवा मिलकर काम करें तो राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं और भारत को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक हाल ही में सीजेपी द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। बाद में सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
