‘सरासर गलत था’, NALSAR के खिलाफ बार काउंसिल के आदेश पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने हैदराबाद के नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज (एनएएलएसएआर) लॉ कॉलेज के 2026 बैच के छात्रों को वकील के रूप में पंजीकरण करने से रोकने वाला अपना आदेश वापस ले लिया है. इससे कुछ घंटे पहले, बीसीआई ने सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि हैदराबाद के एनएएलएसएआर लॉ विश्वविद्यालय से 2026 में स्नातक होने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक वकील के रूप में पंजीकृत न किया जाए.
इस बीच पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, “बार काउंसिल ऑफ इंडिया का शुरुआती फैसला, जिसमें उसने NALSAR के स्नातक छात्रों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित करने से रोक दिया था, सरासर गलत था.
आदेश पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि नालसर ने अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI के आने का विरोध किया था. विरोध के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया, लेकिन इससे यह सवाल हल नहीं होता कि BCI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल किस तरह राजनीतिक नियुक्तियों और भारत की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शीर्ष नेताओं द्वारा एक हथियार के रूप में किया जा रहा है.”
बीसीआई अध्यक्ष ने जारी किया था ये आदेश
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार ने गुरुवार (13 अगस्त) की शाम एक बयान में कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, बार काउंसिल इंडिया ने एनएएलएसएआर कार्यालय के संबंध में अपने पूर्व निर्देशों में संशोधन किया है. एनएएलएसएआर के 2026 बैच के सभी उत्तीर्ण छात्र अब अपनी पसंद के राज्य बार काउंसिल में नामांकन करा सकेंगे.
आदेश में कहा गया कि तथ्यात्मक जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. किसी भी छात्र को बिना किसी गलती के नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. मिश्रा ने पहले कहा था कि एनएएलएसएआर से 2026 में कानून की डिग्री प्राप्त करने वाले किसी भी छात्र को परिषद द्वारा आगे के निर्देश जारी होने तक वकील के रूप में नामांकित नहीं किया जाना चाहिए.
