राज्यों से 15 साल का डेटा मांगने पर सियासी बहस, धर्मवार आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज (HLCDC) ने देश में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विस्तृत जानकारी मांगी है। समिति ने पिछले 15 वर्षों के जन्म पंजीकरण, स्कूलों में दाखिले, वाहन रजिस्ट्रेशन, मतदाता पंजीकरण, राशन कार्ड और जमीन से जुड़े आंकड़ों समेत कई तरह की जानकारी मांगी है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मामलों में यह जानकारी धर्मवार भी मांगी गई है।
कई राज्य सरकारों के अधिकारियों ने बताया है कि समिति के सवालों का पूरा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि अलग-अलग सरकारी विभागों में इस तरह का रिकॉर्ड धर्म के आधार पर नियमित रूप से नहीं रखा जाता। इसी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और समिति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने समिति की ओर से मांगी जा रही जानकारी को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसके पीछे पहले से तय एजेंडा हो सकता है। उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली और उसके संभावित निष्कर्षों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, समिति की ओर से ऐसी किसी रिपोर्ट के पहले से तैयार होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जयराम रमेश के इन बयानों को राजनीतिक आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए।
किन-किन आंकड़ों की मांगी गई जानकारी?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समिति ने राज्यों से पिछले 15 वर्षों में हुए जन्म पंजीकरण, स्कूल दाखिले, वाहन रजिस्ट्रेशन, वोटर ID और राशन कार्ड से संबंधित आंकड़े मांगे हैं। इसके अलावा जिलावार धार्मिक स्थलों की जानकारी भी मांगी गई है, जिसमें मंदिर, मस्जिद, चर्च और अन्य धार्मिक संरचनाओं का विवरण शामिल है।
समिति ने धार्मिक स्थलों की पहचान और उनके स्थान से जुड़ी जानकारी के लिए GIS मैपिंग जैसी तकनीक के इस्तेमाल से संबंधित विवरण भी मांगा है। जमीन की खरीद-बिक्री, स्वामित्व में बदलाव और कुछ क्षेत्रों में जमीन के असामान्य रूप से एकत्र होने से संबंधित आंकड़े भी प्रश्नावली का हिस्सा बताए गए हैं।
वोटर रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजों पर भी फोकस
समिति ने पिछले 15 वर्षों में मतदाता पंजीकरण में हुए बदलावों की जानकारी भी मांगी है। इसके साथ ही आधार, वोटर ID और राशन कार्ड के रजिस्ट्रेशन में अचानक हुई वृद्धि तथा फर्जी पहचान दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
कुछ क्षेत्रों में स्कूलों में बच्चों की संख्या और वहां की पिछली जन्म दर के बीच अंतर दिखाई देने पर उसके संभावित कारणों की जानकारी भी राज्यों से मांगी गई है।
आदिवासी क्षेत्रों और धर्म परिवर्तन से जुड़े आंकड़े
समिति के दायरे में अनुसूचित जनजाति आबादी में धार्मिक संरचना में बदलाव भी शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्यों से आदिवासी समुदायों में धर्म परिवर्तन से संबंधित सरकारी अध्ययन, खुफिया रिपोर्ट और आयोगों की रिपोर्ट जैसी जानकारी भी मांगी गई है।
इसके अलावा पांचवीं और छठी अनुसूची वाले क्षेत्र, सीमावर्ती जिले, औद्योगिक क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रहे शहरी इलाकों में जनसंख्या में बदलाव से संबंधित जानकारी भी समिति के अध्ययन का हिस्सा है।
बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की जानकारी
समिति का एक प्रमुख फोकस अवैध या बिना दस्तावेज वाले प्रवास से जुड़े मामलों पर भी है। सरकार की ओर से जारी समिति के आधिकारिक Terms of Reference में अवैध प्रवास, सीमा पार गतिविधियों, असामान्य बसावट और जनसंख्या में बदलाव के कारणों का अध्ययन शामिल है। समिति को ऐसे प्रवासियों की पहचान, हिरासत और कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वासन के लिए स्थायी व्यवस्था की सिफारिश करने का भी दायित्व दिया गया है।
मई 2026 में हुआ था समिति का गठन
गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं। इसके सदस्यों में जनगणना आयुक्त, सेवानिवृत्त IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय के Foreigners-I विभाग के संयुक्त सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है।
सरकार के मुताबिक समिति का उद्देश्य अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करना तथा उनसे निपटने के लिए नीतिगत, प्रशासनिक और कानूनी उपाय सुझाना है। समिति को अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समूहों में असामान्य जनसंख्या बदलाव के पैटर्न का भी अध्ययन करना है।
राज्यों के दौरे से पहले तैयार की गई प्रश्नावली
1 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय ने बताया था कि समिति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर जमीनी स्थिति की जानकारी लेगी। इसके लिए राज्यों से पहले ही आवश्यक जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई थी। समिति केंद्रीय मंत्रालयों से भी जनसांख्यिकीय बदलावों से संबंधित जानकारी और फीडबैक लेने वाली है।
रिपोर्ट देने के लिए एक साल का समय
सरकार ने समिति को अपनी रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर देने का लक्ष्य दिया है। आवश्यकता पड़ने पर इसका कार्यकाल अधिकतम छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है। समिति को जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों का अध्ययन कर केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सीमा प्रबंधन, पहचान प्रणाली और अन्य नीतिगत उपायों को लेकर सिफारिशें देने का अधिकार है।
सच्चर कमेटी से तुलना क्यों?
धर्म आधारित आंकड़ों की चर्चा के बीच कांग्रेस की ओर से सच्चर कमेटी का भी संदर्भ दिया जा रहा है। सच्चर कमेटी का गठन 2005 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए किया था। मौजूदा HLCDC की प्रश्नावली में धार्मिक और सामाजिक समूहों में जनसंख्या बदलाव का अध्ययन शामिल होने के कारण इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस फिर तेज हुई है।
फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि HLCDC की आधिकारिक जिम्मेदारियों में धार्मिक और सामाजिक समुदायों में जनसंख्या बदलाव का विश्लेषण स्पष्ट रूप से शामिल है, जबकि राज्यों से मांगे गए विस्तृत डेटा को लेकर कुछ अधिकारियों ने रिकॉर्ड उपलब्धता और डेटा-फॉर्मेट की व्यावहारिक कठिनाइयों की बात कही है।
