भारतरत्न अटल जी की पुण्यतिथि पर काव्य संध्या
सहारनपुर। पूर्व प्रधानमंत्री और जाने माने कवि भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्यतिथि पर मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान और प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था विभावरी द्वारा अटल भारत काव्य समागम का आयोजन किया गया।
नेशन बिल्डर्स अकादमी के खचाखच भरे पतंजलि सभागार में संस्थान के अधिष्ठाता नंद किशोर शर्मा के संचालन में इस कार्यक्रम की शुरुआत में ही गीतकार अमित कुमार ने पूरब पश्चिम फिल्म का देशभक्ति गीत है प्रीत जहां की रीत सदा…. गाकर समा बांध दिया। डा आर पी सरस्वत के देशभक्ति गीत घर-घर तिरंगा में सारे श्रोता भी उनके संग सुर में सुर मिला उठे, कवि हरिराम पथिक की रचना हर कदम पर रोशनी के पग दिए.. और अपनी माहिया रचनाओं से दिलों पर राज करने वाले डा विजेंद्र पाल शर्मा ने प्रभु चरणों में रहना, श्चाहे फूल अपने जीवन में, तो कांटे मत बोना औरों के आंगन मेंश् ने अच्छी तालियां बटोरी, ओजस्वी कवि पारस नाथ मधुकर ने श्तिरंगा भारत की शान है वीरों की जान है जय हो तिरंगे की… गाया तो देर तक तालियां गूंजती रही।
संचालन कर रहे नंद किशोर शर्मा निदेश की तुलना वत्सल पिता से करते हुए के वात्सल्य पर आधारित कविता पाठ किया। अध्यक्षता कर रहे अंतर्राष्ट्रीय योगगुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने अटल जी से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि मूर्धन्य राजनीतिज्ञ के रूप में अजात शत्रु, सच्चे भारतरत्न और सहज कवि अटल जी मृत्यु से जूझते हुए भी देश भक्ति की अनूठी मिसाल पेशकर गए जिन्होंने मौत को भी धता बताकर पंद्रह अगस्त के राष्ट्रीय उत्सव को राष्ट्रीय शोक दिवस नहीं बनने दिया, झंडा फहराने के दिन को झंडा झुकाने वाला दिन नहीं बनने दिया और सोलह अगस्त को प्राण त्यागे। योग गुरु ने इसपर आधारित अपनी रचना भी सुनाई। यहां स्थित मां सरस्वती देवालय में दीप प्रज्ज्वलन से आरंभ हुई काव्य संध्या का शुभारंभ राष्ट्र गीत वंदे मातरम और समापन राष्ट्रगान से हुआ।
