चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के मार्च पर बोले उमर अब्दुल्ला, कहा- ये सिलसिला चलता रहेगा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को INDIA गठबंधन के चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च को लेकर कहा कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में INDIA गठबंधन की बैठक हुई थी, जिसमें अक्टूबर महीने के लिए पूरा कार्यक्रम और आंदोलन का कैलेंडर तैयार किया गया था। इसी बैठक में 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च करने का फैसला लिया गया था।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विपक्षी दल लंबे समय से मतदाता सूची और वोटरों के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन शुरुआत में बहुत कम लोगों ने इस पर ध्यान दिया। उनके मुताबिक अब मीडिया ने भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और सुप्रीम कोर्ट में भी इससे जुड़े सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि खास तौर पर वोटरों के नाम काटे जाने और किन आधारों पर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अब यह देखना होगा कि अदालत के माध्यम से इन मामलों में कितनी सुधारात्मक कार्रवाई होती है।
चुनाव आयोग मार्च में कई नेता हिरासत में
INDIA गठबंधन के चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। इनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेता शामिल रहे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया।
विपक्षी सांसदों का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया, खासकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), को लेकर उनकी आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया था।
UCC पर भी उमर अब्दुल्ला ने साफ किया रुख
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सवाल पूछे जाने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब तक कोई कानून पूरे देश में लागू नहीं होता, तब तक उसे यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनकी सरकार UCC लागू नहीं करेगी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कई अन्य सरकारों ने भी UCC लागू नहीं करने की बात कही है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार के पास संख्या बल है तो उसे संसद में UCC का कानून लाना चाहिए और उस पर बहस करानी चाहिए।
उमर अब्दुल्ला पहले भी UCC को राज्यों के माध्यम से लागू करने के बजाय संसद के जरिए कानून बनाने की बात कह चुके हैं।
