आरक्षण के मुद्दे पर BJP के सहयोगियों में तकरार, अठावले के बयान पर भड़के ओम प्रकाश राजभर
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले NDA में इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के प्रमुख रामदास अठावले ने आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। वहीं, उत्तर प्रदेश में NDA के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार और आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत की है।
राजभर की पार्टी का कहना है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग वह लंबे समय से करती आ रही है। SBSP के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव ने कहा कि पार्टी वर्ष 2002 से ही इस व्यवस्था की मांग उठाती रही है।
अठावले के बयान पर राजभर ने क्या कहा?
जब ओम प्रकाश राजभर से रामदास अठावले के उस बयान को लेकर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने आरक्षण का विरोध करने वालों पर ‘देशद्रोह’ का मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी, तो राजभर ने इसे अठावले की निजी राय बताया।
राजभर ने कहा कि अठावले को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी पढ़ना चाहिए। उन्होंने ‘कोटे में कोटा’ का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान में चार वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है और सभी वर्गों को इसका लाभ मिलता है।
‘आरक्षण का लाभ मजबूत लोग ले रहे हैं’
ओम प्रकाश राजभर ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि संविधान में आरक्षण का उद्देश्य कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। लेकिन आज इसका लाभ ऐसे परिवारों तक भी पहुंच रहा है, जो पहले ही सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर मुख्यधारा में आ चुके हैं, उन्हें व्यवस्था से अलग करने पर विचार होना चाहिए, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके।
अठावले ने आरक्षण विरोधियों पर कार्रवाई की मांग की थी
इससे पहले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियानों पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि आरक्षण विरोधी अभियान संवैधानिक मूल्यों पर हमला है और इससे सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ सकता है।
अठावले ने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को चिन्हित कर कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा था कि आरक्षण का विरोध करने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी आरक्षण के विरोध पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि आरक्षण किसी की खैरात नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है।
इस तरह आरक्षण के मुद्दे पर NDA के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों के रुख ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
