वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद ढहाने पर रोक की मांग, सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने रेल मंत्री को लिखा पत्र

वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद ढहाने पर रोक की मांग, सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने रेल मंत्री को लिखा पत्र

रामपुर से लोकसभा सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित ऐतिहासिक गंज शहीदा मस्जिद को ढहाने की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पत्र का संदर्भ संख्या MP/LS/DEL/518/2026 है। सांसद ने पत्र में कहा कि यह मामला केवल जमीन-जायदाद का नहीं है, बल्कि कानून के राज, संवैधानिक गारंटी, धार्मिक विरासत की रक्षा और सरकारी कार्रवाई की निष्पक्षता से जुड़ा है।

नदवी के मुताबिक, मस्जिद पर हटाने का नोटिस चिपकाया गया था, लेकिन उस पर न तारीख थी, न हस्ताक्षर, न पदनाम और न ही किसी सक्षम अधिकारी की मुहर। सांसद ने कहा कि सदियों पुराने पूजास्थल को प्रभावित करने वाली कोई भी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और तय कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक ही होनी चाहिए।

मस्जिद 400 साल पुरानी होने का दावा 

पत्र में मस्जिद कमेटी के हवाले से कहा गया है कि गंज शहीदा मस्जिद 1883-84 के सेटलमेंट मैप और पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। रेलवे के बुनियादी ढांचे से यह दशकों, बल्कि सदियों पुरानी है। कुछ रिकॉर्ड हिजरी 1034 यानी 1624-25 ईस्वी में मस्जिद के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं।

1991 के मुकदमे को बताया ‘अप्रासंगिक’ 

रेल प्रशासन जिस सिविल सूट नंबर 1174/1991 अंजुमन इंतजामिया बनाम भारत संघ का हवाला दे रहा है, उस पर सांसद ने तर्क दिया कि वह मुकदमा बगल की जमीन को लेकर था, मस्जिद के अस्तित्व या मालिकाना हक को लेकर नहीं। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की वजह से मुकदमा खारिज हुआ था, इसलिए इसे मस्जिद की कानूनी स्थिति के खिलाफ अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

संविधान और PoW Act का हवाला 

पत्र में आर्टिकल 25 और 26 का जिक्र करते हुए कहा गया कि ये धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं को अपने मामले खुद संभालने का अधिकार देते हैं। साथ ही Places of Worship Act, 1991 का हवाला देते हुए कहा कि भले ही यह जमीन के मालिकाना हक का फैसला न करे, पर इसका मूल उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और पूजास्थलों का ऐतिहासिक चरित्र सुरक्षित रखना है।

‘विकास हो, पर संविधान के साथ’

सांसद ने माना कि विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार राष्ट्रीय प्रगति के लिए जरूरी है, लेकिन यह संवैधानिक मूल्यों, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी सुरक्षा के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने रेल मंत्री से आग्रह किया कि गंज शहीदा मस्जिद के विध्वंस या किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और मालिकाना हक की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

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