पेपर लीक पर सख्ती बढ़ाएगी मोदी सरकार, लोकसभा में आज पेश होगा अहम संशोधन विधेयक
नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में इस विधेयक को पेश करने की अनुमति का प्रस्ताव रखेंगे। प्रस्तावित संशोधन में सात प्रमुख बदलाव किए गए हैं, जिनका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाना और मामलों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
परीक्षा घोटालों के बाद सरकार का बड़ा कदम
हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार को घेरा था। इसी बीच सरकार ने परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से मौजूदा कानून में संशोधन का फैसला किया है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत जांच और मुकदमे की प्रक्रिया के लिए तय समय-सीमा निर्धारित करने पर जोर दिया गया है, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
विधेयक में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार मिलेगा। ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा कानून के तहत दर्ज मामलों की विशेष रूप से सुनवाई करेंगी।
इसके अलावा, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई का प्रावधान किया गया है और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र बना सकेगा स्पेशल टास्क फोर्स
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि यदि परीक्षा में धांधली का मामला गंभीर हो या एक से अधिक राज्यों से जुड़ा हो, तो केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) का गठन कर सकेगी। यह टीम ऐसे मामलों की जांच और समन्वय का काम करेगी।
साथ ही, कानून के तहत दर्ज अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित कानून के तहत राज्य सरकारों को परीक्षा से जुड़े मामलों की पैरवी के लिए विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का अधिकार भी मिलेगा।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति, कोचिंग संस्थान या सेवा प्रदाता संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी जेल की सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन संशोधनों के लागू होने के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
