‘AI का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं’, फर्जी वीडियो पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सख्त; चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज

‘AI का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं’, फर्जी वीडियो पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सख्त; चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कथित बयान वाले वीडियो को पूरी तरह फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया डीपफेक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद परिसर के बाहर मीडिया से हुई उनकी बातचीत के वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई, जिसका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और गलत सूचना फैलाना है। मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

‘AI की मदद से तैयार किया गया डीपफेक’

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि संसद के बाहर मीडिया से की गई उनकी वास्तविक टिप्पणियों को एडिट कर AI तकनीक के जरिए डीपफेक वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक सामग्री लोकतांत्रिक संवाद को प्रभावित करती है और जनता के बीच गलत जानकारी फैलाने का प्रयास करती है।

चाणक्यपुरी थाने में दर्ज हुई FIR

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस मामले में नई दिल्ली के चाणक्यपुरी थाना में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, 25 जुलाई 2026 को सुबह 4:35 बजे एफआईआर संख्या 123/26 दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि फर्जी वीडियो बनाने, साझा करने या उसे बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘AI का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल स्वीकार नहीं’

पीयूष गोयल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को बदनाम करने और लोगों को भ्रमित करने के लिए AI का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी वायरल वीडियो या दावे पर विश्वास करने से पहले केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से उसकी पुष्टि करें।

उन्होंने विश्वास जताया कि देश के जागरूक नागरिक, विशेषकर युवा, इस तरह की भ्रामक और छेड़छाड़ की गई सामग्री के बहकावे में नहीं आएंगे।

वायरल वीडियो को लेकर क्या दावा है?

सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में पीयूष गोयल का एक कथित वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उनके नाम से आपत्तिजनक बयान प्रसारित किए जाने का दावा किया गया। केंद्रीय मंत्री ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा कि इसमें उनके वास्तविक बयान से छेड़छाड़ की गई है और AI तकनीक का इस्तेमाल कर उसे डीपफेक के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाया गया कथित बयान उनका नहीं है और इसकी कानूनी जांच कराई जा रही है।