‘मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है’, वंदे मातरम् कानून पर मौलाना अरशद मदनी ने जताई आपत्ति

‘मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है’, वंदे मातरम् कानून पर मौलाना अरशद मदनी ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों से वंदे मातरम् विधेयक पारित होने के बाद देश में राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह मुद्दा विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई मुस्लिम संगठनों ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

मौलाना अरशद मदनी ने क्या कहा?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को किसी के वंदे मातरम् गाने या पढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी धार्मिक मान्यताएं अलग हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में इबादत केवल एक अल्लाह की की जाती है और किसी अन्य को उसमें शामिल नहीं किया जा सकता।

मदनी का कहना है कि वंदे मातरम् के कुछ अंश इस्लामी मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए किसी भी मुसलमान को इसे गाने या स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला

मौलाना मदनी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। साथ ही उन्होंने अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। उनके अनुसार किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत किसी विचार, नारे या गीत को अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी एक बयान जारी कर कहा कि वंदे मातरम् को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने का प्रयास धार्मिक और संवैधानिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।

वंदे मातरम् कानून में क्या हैं प्रावधान?

वंदे मातरम् विधेयक को 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा की मंजूरी मिली। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून का रूप ले सकेगा। प्रस्तावित कानून के तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक के अनुसार, वंदे मातरम् के गायन के दौरान जानबूझकर अपमान करने, बाधा पहुंचाने या व्यवधान उत्पन्न करने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।

विरोध करने वालों की दलील

विधेयक का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओं और संगठनों का कहना है कि इसके कुछ प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना कर रहा है। ऐसे में संसद को इन विषयों पर अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए।

विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि यह कानून एक विशेष समुदाय को प्रभावित कर सकता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल राष्ट्रीय गीत के सम्मान और संरक्षण को सुनिश्चित करना है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद इसके लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।