लखनऊ अग्निकांड: LDA की भूमिका पर उठे सवाल, अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई थी रद्द?

लखनऊ अग्निकांड: LDA की भूमिका पर उठे सवाल, अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों हुई थी रद्द?

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब इमारत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। जिस भवन में सोमवार को यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन महज दो महीने के भीतर ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था। अब यह फैसला जांच का बड़ा विषय बन गया है।

1980 में हुआ था भवन का आवंटन

अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के जरिए विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय को किराया-क्रय योजना के तहत किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध पूरा होने के बाद भवन का कब्जा उन्हें सौंप दिया गया।

इसके बाद वर्ष 2005 में विक्रय विलेख के माध्यम से यह संपत्ति विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुई। 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को LDA ने दोनों के पक्ष में नामांतरण कर दिया। लगभग 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।

दो महीने में ही रद्द हो गया ध्वस्तीकरण आदेश

बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायत सामने आई, जिसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज किया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था। हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि 5 जुलाई 2016 को यानी दो महीने से भी कम समय में इस ध्वस्तीकरण आदेश को निरस्त कर दिया गया।

पांच अधिकारियों की टीम करेगी जांच

अग्निकांड के बाद अब पूरे मामले की जांच के लिए अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में केके गौतम, LDA के चीफ इंजीनियर मानवेंद्र सिंह, बिजली विभाग के प्रमुख मनोज सागर और ओएसडी रविनंदन सिंह शामिल हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर LDA के एई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा एफएसएसओ इंदिरा नगर कमलेन्द्र कुमार सिंह और एक्सईएन कलेक्शन जानकीपुरम गौरव कुमार के खिलाफ भी तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: मंत्री सुरेश खन्ना

प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और इस हादसे के जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उनके पद की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की मौत धुएं के कारण दम घुटने से हुई।

कानपुर के दो युवकों की भी गई जान

इस दर्दनाक हादसे में कानपुर के दो युवकों की भी मौत हो गई। दोनों युवक बिल्डिंग में स्थित एक एनिमेशन कंपनी में 3डी आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत थे। एक साथ काम करने की वजह से दोनों में गहरी दोस्ती थी। हादसे की सूचना मिलते ही उनके परिवारों में मातम छा गया और परिजन तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

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