श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्रकरण में आज नहीं हो सकी बहुप्रतीक्षित सुनवाई, अब पांच तथा 15 की तारीख तय

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्रकरण में आज नहीं हो सकी बहुप्रतीक्षित सुनवाई, अब पांच तथा 15 की तारीख तय
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पिछले दिनों श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई कर जल्द निस्तारण के निर्देश दिए थे। अदालत ने मनीष यादव और महेंद्र प्रताप सिंह के मामले में सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तारीख तय की है।

मथुरा। भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में मामला सुलझने के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में उनके जन्मस्थान के मामले में कोर्ट में दायर वादों पर सुनवाई चल रही है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली से सटी शाही मस्जिद ईदगाह को हटाने की मांग की जा रही है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान तथा शाही मस्जिद ईदगाह मामले में शुक्रवार को आठ वादों पर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई होनी थी। कोर्ट में शोक अवकाश होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट में आज दस में से आठ वाद की सुनवाई एक साथ होनी थी। अब पांच जुलाई को दो तथा 15 जुलाई को छह मामलों की सुनवाई होगी।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले में शुक्रवार को आठ वादों पर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई होनी थी। इन वादों में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाकर पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पिछले दिनों श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई कर जल्द निस्तारण के निर्देश दिए थे।

अदालत ने मनीष यादव और महेंद्र प्रताप सिंह के मामले में सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तारीख तय की है। शैलेंद्र सिंह, दिनेश शर्मा, अनिल त्रिपाठी, पंकज, पवन शास्त्री और रंजना अग्निहोत्री के मामले में सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि तय की है।

दायर वादों में कई याची ने शाही मस्जिद ईदगाह का आर्कोलाजिकल सर्वे कराने के साथ ही खोदाई कराने तथा कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की है। इन प्रार्थना पत्रों पर भी एक जुलाई को सुनवाई की जानी थी। जून में सिविल अदालतें बंद होने के कारण एक माह तक इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी थी।

अब तक इस मामले में दस वाद अदालत में दायर हो चुके हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाने की मांग को लेकर सबसे पहला वाद 26 सितंबर 2020 को दायर किया गया था। तब से अब तक इस मामले में 10 वाद अलग-अलग लोगों ने दायर किए हैं। सभी की सुनवाई इसमें सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में होनी है। इससे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री, मनीष यादव, महेंद्र प्रताप सिंह, दिनेश चंद्र शर्मा, शैलेंद्र सिंह, पंकज, पवन कुमार शास्त्री, अनिल कुमार त्रिपाठी के वादों पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी।

एक साथ नौ वादों और 15 प्रार्थना पत्रों में श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन से कब्जा हटाने की मांग की गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ भू-सम्पति से संबंधित सभी मामलों के तथ्य तथा उनकी प्रकृति एक ही समान होने के कारण सभी मामले को एक साथ सुने जाने की मांग रखी थी। वर्ष 1997 में हाईकोर्ट के एक आदेश में मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि की वर्तमान में विवादित संपत्ति पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट का मालिकाना हक माना गया है। जिसके बाद से कई याचिका दायर कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि संस्थान और ईदगाह कमेटी के मध्य किया गया समझौता अमान्य करने की भी मांग की गई है। यहां पर जमीन से कब्जा हटवाने के लिए सबसे पहला वाद 25 सितंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर किया था। जिसमें यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट व श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले में अब तक दस वाद दायर हो चुके हैं।

 


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