युआन के मुकाबले रुपये की कमजोरी से बढ़ सकता है आयात बिल, भारत-चीन कारोबार पर असर
भारतीय रुपये में गिरावट का असर सिर्फ डॉलर के मुकाबले ही नहीं, बल्कि चीन की करेंसी युआन के मुकाबले भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युआन के सामने रुपये की कमजोरी भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है, क्योंकि भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोलर उपकरण और कई जरूरी वस्तुएं बड़े पैमाने पर खरीदता है।
रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अब तक युआन के मुकाबले रुपया 6 से 8 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। इसका सीधा असर चीन से आने वाले सामानों की लागत पर पड़ सकता है। यदि आयात महंगा होता है, तो उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों और औद्योगिक लागत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
व्यापार घाटे की चुनौती
भारत का चीन से आयात निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में करेंसी में कमजोरी व्यापार घाटे को और चौड़ा कर सकती है। 2025 में चीन से भारत का आयात 115 अरब डॉलर से अधिक बताया गया था और 2026 में इसमें और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। सरकार और रिजर्व बैंक स्थानीय मुद्रा में व्यापार, एनर्जी इम्पोर्ट के विविधीकरण और विदेशी निवेश आकर्षित करने जैसे उपायों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन आने वाले महीनों में रुपये की चाल महंगाई और व्यापार नीति के लिए अहम संकेत देगी।
