‘ना ज्यादा सोचो, ना उम्मीद रखो, और…’, 270 रन बनाने के बाद क्या बोले ईशान किशन?

‘ना ज्यादा सोचो, ना उम्मीद रखो, और…’, 270 रन बनाने के बाद क्या बोले ईशान किशन?

New Delhi : दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईशान किशन ने इतिहास रच दिया. ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने साउथ जोन के खिलाफ 270 रनों की पारी खेली. इस ऐतिहासिक पारी के बाद उन्होंने बड़ा बयान दिया. ईशान ने कहा कि करियर के मुश्किल दौर ने उन्हें ज्यादा ना सोचने और खुद से अनावश्यक उम्मीदें रखने से दूर रहना सिखाया है. अब उनका पूरा ध्यान सिर्फ रन बनाने और टीम को जीत दिलाने पर है.

ईशान ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैंने खुद को बदलने की कोई खास कोशिश नहीं की. यह बदलाव अपने आप हुआ. जब मैं भारतीय टीम से बाहर था, तब मुझे एहसास हुआ कि आखिरकार हमारे पास करने के लिए सिर्फ एक ही काम है और वह रन बनाना है. यही एक चीज है जो आपके करियर में आपकी मदद करती है. किसी दूसरी चीज के बारे में सोचना आपकी मानसिकता को प्रभावित करता है और बेवजह का दबाव बढ़ाता है. मुझे समझ आ गया कि इन अतिरिक्त विचारों की कोई जरूरत नहीं है. हमारा काम मैदान पर उतरना और टीम के लिए मैच जीतना है.”

उन्होंने आगे कहा, “आपको बस इसी चीज की परवाह करनी चाहिए. समय के साथ आप खुद को बेहतर तरीके से समझने और विकसित करने लगते हैं. मुझे लगता है कि जब आपका दिमाग स्पष्ट हो तो इस तरह खेलना काफी आसान हो जाता है.”

ईशान 2023 में भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे, लेकिन कई अप्रत्याशित घटनाक्रमों के बाद उनका करियर मुश्किल दौर में पहुंच गया और उन्हें बीसीसीआई के केंद्रीय अनुबंध (सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट) से भी बाहर होना पड़ा. ईशान ने इसके बाद घरेलू क्रिकेट में जमकर मेहनत की. उन्होंने 2025-26 रणजी ट्रॉफी में शतक लगाए और झारखंड को उस सत्र की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने में अहम योगदान दिया. उन्होंने टूर्नामेंट में 517 रन बनाए, जिसमें दो शतक शामिल थे.

किशन को जल्द ही बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध वापस मिल गया और सफेद गेंद के प्रारूपों में भारतीय टीम में भी जगह मिल गई. अब वह अपने करियर के उस मुश्किल दौर को पीछे छोड़ चुके हैं. इस बारे में उन्होंने कहा, “आजकल मैं जो सबसे अच्छी चीज कर रहा हूं, वह है किसी भी चीज के बारे में ज्यादा न सोचना. एक बल्लेबाज के तौर पर मेरा काम बस मैदान पर जा कर गेंद के मुताबिक प्रतिक्रिया देना है. मैं खुद से किसी तरह की उम्मीद नहीं रखता.”

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