सोनिया गांधी की किताब पर विवाद, कांग्रेस ने पेंगुइन से पूछा- भारत में आपत्ति थी तो विदेश में क्यों नहीं?

सोनिया गांधी की किताब पर विवाद, कांग्रेस ने पेंगुइन से पूछा- भारत में आपत्ति थी तो विदेश में क्यों नहीं?

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शुक्रवार (28 अगस्त 2026) को अपनी पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के रुख पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि अगर किताब को लेकर संपादकीय और फैक्ट-चेकिंग से जुड़ी आपत्तियां थीं, तो वैश्विक स्तर पर इसके प्रकाशन के दौरान ऐसी चिंताएं क्यों नहीं उठाई गईं?

यह विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कथित तौर पर संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद के चलते किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।

कांग्रेस ने पेंगुइन के दावे पर उठाए सवाल

कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने पेंगुइन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पेंगुइन समूह दुनिया के दूसरे हिस्सों में इस किताब को प्रकाशित कर सकता है, तो भारत में फैक्ट-चेकिंग को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों का क्या आधार है?

कांग्रेस ने यह प्रतिक्रिया PRHI के उस बयान के बाद दी, जिसमें कंपनी ने कहा था कि किसी किताब के तथ्यों की जांच करना और लेखक को उसकी पुस्तक के हित में सुझाव देना प्रकाशक की जिम्मेदारी और अधिकार दोनों हैं।

संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद का दावा

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, PRHI और किताब की लेखिका सोनिया गांधी के बीच कथित तौर पर पांडुलिपि के एक हिस्से को लेकर संपादकीय बदलावों पर मतभेद हुए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रकाशक ने कुछ हिस्सों में बदलाव या उन्हें हटाने की मांग की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी ने कथित तौर पर इन बदलावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद किताब को भारत में प्रकाशित करने के फैसले को लेकर स्थिति बदल गई।

PRHI ने रिपोर्ट को बताया गलत

हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इन दावों को खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि PRHI भारत में ‘Belonging’ की प्रकाशक नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि कंपनी ने लेखक द्वारा संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं करने के कारण किताब को प्रकाशित करने से इनकार किया।

कंपनी ने कहा कि प्रकाशन प्रक्रिया के तहत तथ्यों की जांच करना और लेखकों को आवश्यक सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। PRHI के मुताबिक, उसकी ओर से किताब प्रकाशित करने की इच्छा थी।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रकाशन समूह और लेखिका के बीच हुई गोपनीय बातचीत पर वह आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगा।

क्या है पूरा विवाद?

पूरे मामले में फिलहाल मुख्य विवाद यही है कि भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर PRHI की भूमिका क्या थी और संपादकीय बदलावों को लेकर वास्तव में किन मुद्दों पर असहमति हुई। कांग्रेस जहां प्रकाशक के रुख पर सवाल उठा रही है, वहीं PRHI का कहना है कि उसके बारे में प्रकाशित दावे परिस्थितियों को सही तरीके से पेश नहीं करते।

Leave a Reply