सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस भी उतरी, पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर की मुलाकात

सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस भी उतरी, पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर की मुलाकात

नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को अब कांग्रेस का भी समर्थन मिल गया है। पिछले करीब 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे वांगचुक से शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन जताया। इससे पहले आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के नेता भी उनसे मिलने पहुंच चुके हैं।

कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग

पवन खेड़ा के जंतर-मंतर पहुंचने से पहले कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में जवाबदेही की कमी के कारण परीक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

सोनम वांगचुक और उनके समर्थक भी कथित परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

पहले ही पहुंच चुके हैं कई विपक्षी नेता

कांग्रेस से पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाए जाने की बात भी कही थी।

वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और सांसद रुचि वीरा ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की। शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने भी उनके आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

राज ठाकरे ने भी दिया समर्थन

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी सोनम वांगचुक की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार देश में विरोध-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करना चाहती है। ठाकरे ने कहा कि केवल नीट ही नहीं, बल्कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस दिशा में हस्तक्षेप करने की अपील की।

20 दिनों से अनशन पर हैं वांगचुक

सोनम वांगचुक पिछले लगभग 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए और आवश्यक चिकित्सीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

वांगचुक के आंदोलन को लगातार विपक्षी दलों का समर्थन मिलने से यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।