54 वर्ष के हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: अजय सिंह बिष्ट से यूपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल होने तक का सफर

54 वर्ष के हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: अजय सिंह बिष्ट से यूपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल होने तक का सफर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। आध्यात्मिक जीवन से राजनीति तक का उनका सफर भारतीय राजनीति की चर्चित यात्राओं में से एक माना जाता है। गोरक्षपीठ के महंत से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर इतिहास रचा। उन्होंने गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक के रूप में विधानसभा में प्रवेश किया और दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

22 वर्ष की उम्र में चुना संन्यास का मार्ग

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट और माता सावित्री देवी हैं। सात भाई-बहनों में वे पांचवें स्थान पर हैं।

उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1993 में एमएससी की पढ़ाई के दौरान उनका संपर्क गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ से हुआ। 15 फरवरी 1994 को उन्होंने महंत अवैद्यनाथ से दीक्षा ग्रहण कर संन्यास लिया और अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बन गए।

26 साल की उम्र में बने सांसद

राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई, जब महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा। मात्र 26 वर्ष की आयु में चुनाव जीतकर वे उस समय के सबसे युवा सांसदों में शामिल हो गए।

इसके बाद उन्होंने 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार पांच बार गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया। पूर्वांचल की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया और वे भाजपा के प्रमुख हिंदुत्ववादी चेहरों में शामिल हो गए।

आध्यात्म और राजनीति का संतुलन

गोरक्षपीठ की जिम्मेदारियों के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े संस्थानों का संचालन भी संभाला। गोरखनाथ मंदिर से जुड़े विद्यालयों, महाविद्यालयों और चिकित्सीय संस्थानों के प्रबंधन में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

उनकी दिनचर्या आज भी अनुशासन और सादगी के लिए जानी जाती है। सुबह योग, पूजा-पाठ, गोसेवा और जनता दरबार से शुरू होने वाला उनका दिन देर रात तक जनसंपर्क और प्रशासनिक कार्यों में व्यतीत होता है।

विवादों और चुनौतियों के बीच बढ़ता राजनीतिक कद

राजनीतिक जीवन में योगी आदित्यनाथ कई बार विवादों और चुनौतियों का सामना भी करते रहे। पूर्वांचल में उनकी सक्रियता, हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर मुखर रुख और जनसभाओं में दिए गए भाषण उन्हें लगातार चर्चा में रखते रहे। इसके बावजूद उन्होंने अपने राजनीतिक आधार को मजबूत बनाए रखा।

वर्ष 2007 और 2009 के दौरान उन्होंने भाजपा नेतृत्व के सामने कई मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राय रखी, जिससे उनका प्रभाव और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़े।

मुख्यमंत्री के रूप में नया अध्याय

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, निवेश, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए।

वर्ष 2022 में दोबारा सत्ता में लौटकर उन्होंने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई और वे भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हो गए।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता प्रभाव

उत्तर प्रदेश के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के चुनावों में भी योगी आदित्यनाथ भाजपा के प्रमुख प्रचारक के रूप में सक्रिय रहे हैं। उनकी सभाओं और भाषणों का असर कई चुनावी राज्यों में देखने को मिला है।

आध्यात्म, संगठन और राजनीति के समन्वय के साथ योगी आदित्यनाथ ने खुद को भारतीय राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में स्थापित किया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका बढ़ता राजनीतिक कद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण चेहरा बनाता है।

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