UP में BJP का 2027 गेम प्लान: Yogi की 115 सीटों पर सेंधमारी, निशाने पर SP-Congress का गढ़
अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। सियासी दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश देश का सबसे प्रमुख राज्य है और यह माना जाता है कि यहां जिसकी भी सरकार रहती है, उसका दिल्ली की राजनीति में भी दबदबा देखने को मिलता है। वर्तमान परिस्थितियों में देखें तो भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ही मुख्य मुकाबला होता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को भी कम नहीं समझा जा सकता है। एक ओर मायावती के नेतृत्व वाली बसपा अपनी खोए हुए जनाधार को वापस लेने में जुटी है। तो वहीं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) चंद्रशेखर के नेतृत्व में दलित वोटबैंक पर नजर जमाए हुए है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव अभी भी अपने PDA समीकरण यानी कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। जबकि भाजपा पूरा चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर ले जाना चाहती है।
115 सीटों पर फोकस
वर्तमान में देखें तो योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। अलग-अलग परियोजनाओं का उद्घाटन करने के साथ ही वह विरोधियों पर भी निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। मई से लेकर अब तक अगर हम गौर करें तो उत्तर प्रदेश के 75 में से 44 से ज्यादा जिलों का दौरा योगी आदित्यनाथ ने कर लिया है। इन दौरों के दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े परियोजनाओं का उद्घाटन या आधारशिला किया है। इन 115 सीटों में से 58 फ़ीसदी सीटे ऐसी हैं जहां लोकसभा चुनाव में विपक्षी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था। यही कारण है कि भाजपा ने अभी से ही इन सीटों पर अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
2024 लोकसभा चुनाव की बात करें तो इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 67 सीटों पर बढ़त मिली थी। इसमें 54 समाजवादी पार्टी के खाते में गया था जबकि 13 विधानसभा में कांग्रेस के पक्ष में रहा था। भाजपा 47 पर ही आगे रही जबकि उसकी सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल को एक सीट पर बढ़त थी। 2022 के समीकरण को देखें तो 115 में से भाजपा ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि तीन सीट पर अपना दल सोनेलाल और निषाद पार्टी ने दो सीट पर जीत हासिल की थी। समाजवादी पार्टी को सिर्फ 33 सीटें मिली थी जबकि उसके गठबंधन के उस समय सहयोगी रहे आरएलडी और सुभासपा को क्रमशः तीन और दो सीटें मिली थी। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में कामयाब रही थी।
इन 115 विधानसभा सीटों में 43 लोकसभा की सीटें आती हैं। 2024 में 21 पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी जबकि तीन सीटों पर कांग्रेस विजयी रही थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के खाते में 19 सीटें आई थीं। कांग्रेस ने रायबरेली, सहारनपुर और बाराबंकी में जीत हासिल की थी। समाजवादी घाट के खाते में मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़, फिरोजाबाद के अलावा रामपुर, गाज़ीपुर, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, कैराना और जालौन जैसी सीटे शामिल हैं। भाजपा ने जिन सीटों पर जीत हासिल की थी उनमें आगरा, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कुशीनगर, पीलीभीत, हाथरस, गौतम बुद्ध नगर, देवरिया, अलीगढ़, झांसी और महाराजगंज शामिल है। आरएलडी को बागपत और बिजनौर में जीत मिली थी।
योगी का दौरा कहां-कहां हुआ
योगी के दौरा की कुछ महत्वपूर्ण सीटों की बात करें तो इसमें रायबरेली शामिल है जहां उन्होंने 24 अगस्त को दौरा किया था इस दौरान उन्होंने 879 करोड रुपए के प्रोजेक्ट का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। यह प्रोजेक्ट बछरावां, हरचंदपुर और रायबरेली से जुड़ी हुई है। इन तीनों ही सीटों पर कांग्रेस 2024 लोकसभा चुनाव में आगे रही है। योगी आदित्यनाथ ने 26 जुलाई को मैनपुरी में भी कार्यक्रम किया था। मैनपुरी को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है। अखिलेश यादव खुद वहीं से आते हैं। इसके अलावा भाजपा के लिए 2024 में सबसे बड़ा झटका फैजाबाद अयोध्या में लगा था। यहां भी मुख्यमंत्री ने ताबड़तोड़ दौरे किए हैं और अलग-अलग सौगात दिए हैं। मुख्यमंत्री का फोकस अपने गृह जिला गोरखपुर में भी रहता है। साथ ही साथ वह बनारस पर भी विशेष ध्यान रखते हैं क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय सीट है।
समीकरणों की परीक्षा
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती अगर मजबूत होती है तो फिर इससे भाजपा को फायदा हो सकता है। अगर मायावती के वोटो में बिखराव होता है तो भी भाजपा को फायदा हो सकता है। लेकिन अगर मायावती का वोट सपा या कांग्रेस को ट्रांसफर होता है तो यह भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा चंद्रशेखर रावण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 45 सीटों पर अपनी जोर लगा रहे हैं। अगर इन 45 सीटों पर कांग्रेस या समाजवादी पार्टी से उनका गठबंधन हो जाता है तब बीजेपी के लिए बेचैनी का सबब बन सकता है। अगर चंद्रशेखर रावण की पार्टी अकेले लड़ती है तो भी बीजेपी के लिए यह फायदे की स्थिति हो सकती है।
