‘चुंगीजीवी हो गई BJP’ अश्नीर ग्रोवर का वीडियो शेयर कर UPI Charge पर अखिलेश यादव का पहला बयान
यूपीआई में ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने वाले फैसले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहली प्रतिक्रिया दी है. कारोबारी अश्नीर ग्रोवर का वीडियो शेयर कर यूपी के पूर्व सीएम ने भारतीय जनता पार्टी को ‘चुंगीजीवी’ बताया है.
सोशल मीडिया पर अखिलेश ने लिखा कि भाजपा दूसरों की कमाई से कमाने के चक्कर में UPI से भुगतान करने पर भी पैसे वसूलने का काम करनेवाली है. ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी क्या ऐसे बनेगी. कन्नौज सांसद ने लिखा कि पेमेंट गेटवे से भी पैसा ऐंठनेवाली भाजपा ‘चुंगीजीवी’ बन गई है.
बता दें सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लेना तय किया. इसमें 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा. इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था समाप्त हो गई है. इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां लंबे समय से इस पर सवाल उठा रही थीं.
UPI पर क्या है मोदी सरकार का बयान?
आधिकारिक बयान के मुताबिक, नए बदलाव 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो जाएंगे. इन सबके बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की बैठक में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस ‘जनविरोधी फैसले’ का असर पूरे देश पर होगा. बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब ने बताया कि यूपीआई का मुद्दा बुधवार की बैठक की कार्यवाही का हिस्सा नहीं था, लेकिन सदस्यों ने इस संबंध में चिंताएं व्यक्त कीं. उन्होंने कहा कि अक्टूबर में नई समिति के अस्तित्व में आने के बाद इस मुद्दे पर विचार किया जा सकता है.
संसदीय समिति की बैठक में ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट्स’ के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. महताब ने कहा कि समिति पिछले करीब एक वर्ष से इस विषय पर विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर रही है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) सहित अन्य पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर चुकी है. उन्होंने कहा कि समिति के समक्ष मूल सवाल यह है कि सरकार ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट्स’ को स्वीकार नहीं कर रही है और न ही उन्हें विनियमित करना चाहती है, लेकिन नियमन नहीं होने से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के लिए अधिक गुंजाइश पैदा हो रही है.
