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Bihar Election 2020: महागठबंधन में 144 पर RJD तो 70 पर लड़ेगी कांग्रेस, VIP बोली- मंजूर नहीं

 

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही महागठबंधन में सीटों को लेकर चल रही सस्साकशी शनिवार की शाम खत्म हो गई। बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी 144 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं कांग्रेस को 70 सीटें दी गई हैं। सीपीआइ को छह तो सीपीएम को चार सीट दी गई है। इस बीच वीआइपी (विकासशील इंसान पार्टी) ने इसे धोखा बतरया तथा महागठबंधन से बाहर हो गई।                                                                                                                                                          
ऐसे हुआ सीटों का बंटवारा

राजद : 144

कांग्रेस : 70

भाकपा माले : 19

भाकपा : 06

माकपा : 04

उपमुख्यमंत्री की बात पर आए थे महागठबंधन में

सीटों के ऐलान के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलते हुए नाराज वीआइपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने आरजेडी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने हमें धोखा दिया है। हम 25 सीट और उपमुख्यमंत्री पद की बात पर महागठबंधन में शामिल हुए थे, मगर सीट एडजस्ट करने की बात ही नहीं की गई। इस लिए वीआइपी महागठबंधन से बाहर हो रही है। सहनी ने आरोप लगाया है कि उन्हें गठबंधन में अंधेरे में रखा गया। उन्होंने ये भी कहा कि उनका अभी किसी से संपर्क नहीं किया है। अपने नेताओं से बात करने के बाद ही किसी तरह का फैसला लेंगे। सहनी ने ये कहते हुए बीच में ही प्रेस कॉन्फेंस छोड़ दी। उनके बाहर आने के दौरान ही वीआइपी के कार्यकर्ताओं ने होटल मार्या में जमकर हंगामा किया। काफी देर तक गहमागहमी मची रही।

महागठबंधन में राजद के खाते में 144 सीटें

विधानसभा की कुल 243 सीटों पर चुनाव हो रहा है। महागठबंधन में राजद के खाते में 144 सीटें आई हैं। कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ेगी। वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट भी उसे दी गई है, जहां उप चुनाव होना है। 2019 के चुनाव में शाश्वत केदार वहां से कांग्रेस के प्रत्याशी थे। वाम दलों में भाकपा (माले) को बंटवारे में 19 सीटें मिली हैं। भाकपा को छह और माकपा को चार सीटें। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को राजद अपने कोटे से सीटें देगा। हालांकि तेजस्वी ने झामुमो के साथ वीआइपी को भी अपने हिस्से से सीटें देने की घोषणा की थी, लेकिन वीआइपी अब अलग रास्ते पर निकल चुकी है।

सबको साथ लेकर चलने का प्रयासः तेजस्वी

सीटों की घोषणा करने से पहले तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के आत्मसम्मान के लिए सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया गया है। हम ठेठ बिहारी हैं। जो वादा करते हैं, उसे पूरा करते हैं। हमारा डीएनए भी शुद्ध है। राज्य सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की जनता बदहाल है, बेहाल है, बेरोजगार, लाचार और बीमार है, जबकि डबल इंजन की सरकार आइसीयू में है। पानी के जमने से काई पैदा होती है और उससे कई प्रकार की बीमारियां होती हैं। प्रदेश सरकार का हाल भी काई जैसे हो गया है। महागठबंधन नदी के बहते जल की तरह साफ-सुथरी सरकार देगा।

दस लाख नौकरी देने की बात दोहराई

तेजस्वी ने कहा, नीतीश कुमार कहते हैं कि पूरा बिहार उनका परिवार है, लेकिन केवल भाषण से काम नहीं चलता। उन्होंने बिहार को तरक्की की राह पर लाने के लिए महागठबंधन को एक मौका देने की बात कही। सरकार बनने पर 10 लाख सरकारी नौकरी देने की बात भी दोहराई और कहा कि मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही नौकरी का आदेश जारी कर दिया जाएगा। तेजस्वी ने कहा कि जिनकी सीटें एडजस्ट नहीं हो पाईं, उनसे वे सिर्फ इतना ही कहना चाहते हैं कि बिहार को बचाने के लिए वे थोड़ी कुर्बानी दें।

कांग्रेस ने तेजस्वी को माना नेता

कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी अध्यक्ष अविनाश पांडेय ने कहा कि राजद के साथ कुछ मसलों पर हमारी वैचारिक मतभिन्नता हो सकती है, लेकिन बिहार को बचाने के लिए हम पूरी मजबूती से एक साथ हैं। महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव नेता होंगे। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की सराहना करते हुए अविनाश ने उन्हें गरीबों की आवाज बताया। कहा कि बिहार एक युवा राज्य है। इसे बचाने के लिए जनता महागठबंधन के हाथों को मजबूत करे। संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में कांग्रेस से सदानंद सिंह, माले से दीपंकर भट्टाचार्य, भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय और माकपा के राज्य सचिव अवधेश कुमार के साथ ही वीआइपी अध्यक्ष मुकेश सहनी भी मौजूद रहे।

 
 

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