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तरक्की के ट्रैक पर दौड़ रही किसान ट्रेनें, किसानों को मिल रहा उचित दाम तो उपभोक्ता को महंगाई से निजात

 

नई दिल्ली। कृषि सुधार को लेकर संसद से पारित कानूनों का सीधा असर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। उत्पादक व उपभोक्ता मंडियों के बीच किसान ट्रेनों के संचालन की पहल ने जिंस बाजारों का रुख बदल दिया है। अंतरराज्यीय कारोबार शुरु होने का तत्काल फायदा जहां किसानों को उनकी उपज के उचित मूल्य के रूप में मिला वहीं उपभोक्ता को महंगाई से निजात दिलाने में हु सहूलियतई है। रेलवे के पास कई राज्यों से और किसान ट्रेन चलाने की मांग आ रही है, जिनमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, पश्चिम बंगाल और दक्षिण के राज्य प्रमुख हैं।

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से दिल्ली के आदर्शनगर रेलवे स्टेशन पर टमाटर की पहली बड़ी खेप लेकर पहुंची किसान ट्रेन ने कीमतों पर काबू पाने में मदद पहुंचाई। उस समय दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में टमाटर 80 से 90 रूपए प्रति किलो की दर से बिक रहा था। टमाटर उत्पादक राज्यों से ताबड़तोड़ दिल्ली पहुंची दो किसान ट्रेनों में तकरीबन 500 टन से अधिक टमाटर लदा था। इसका सीधा असर दिल्ली की विभिन्न मंडियों में दिखने लगा। आसमान छूते टमाटर ही नहीं प्याज भी काबू में आने लगा है।

कृषि उत्पादों के अंतरराज्यीय कारोबार की मिली छूट के बाद तो विभिन्न उत्पादक राज्यों से किसान ट्रेनों की सर्वाधिक मांग आने लगी है। भारतीय रेलवे के लिए सब्जियों और फलों के साथ मछलियां और अन्य कृषि उत्पादों का यह कारोबार काफी मुफीद साबित होने लगा है। भारतीय रेलवे के एक आला अफसर ने बताया कि माल भाड़े के कारोबार को बहुत बढ़ावा मिल रहा है। किसान ट्रेन चलाने की घोषणा तो भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के आम बजट में ही कर रखी थी। लेकिन इसकी शुरुआत तभी हो पाई जब पांच जून 2020 को केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादों के अंतरराज्यीय कारोबार के बाबत अध्यादेश जारी किया।

किसान ट्रेनों के संचालन का दायित्व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के साथ संयुक्त रूप से किया जाता है। आपरेशन ग्रीन के तहत कच्ची जिंस (जल्दी खराब होने वाले उत्पाद) की सप्लाई चेन को सुनिश्चित करने के लिए 500 करोड़ रूपए का बंदोबस्त किया गया है। किसान ट्रेनें इसमें सबसे ज्यादा मुफीद साबित होने लगी हैं।

पहली किसान ट्रेन महाराष्ट्र के देवलाली से बिहार के दानापुर के बीच साप्ताहिक तौर पर सात अगस्त 2020 को शुरु की गई। लेकिन किसानों की जबर्दस्त मांग को देखते हुए इसे जहां सप्ताह में तीन कर दिया गया, वहीं इसे बिहार में मुजफ्फरपुर तक बढ़ा दिया गया। उधर, महाराष्ट्र में इस ट्रेन की लोकप्रियता को देखते हुए इसमें लिंक ट्रेन जोड़ी गई, जो सोलापुर के पास संगोला और पुणे से चल रही है। यह लिंक ट्रेन किसान ट्रेन से मनमाड़ में जुड़ जाती है।

दूसरी ट्रेन आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से न्यू आदर्शनगर दिल्ली के बीच नौ सितंबर 2020 को चली। इसमें 12 पार्सल वैन लगे हैं, जिसमें सर्वाधिक टमाटर की लदान की गई। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिमी राज्यों के बीच चली इन ट्रेनों में अनार, केला, संतरा, प्याज, गोभी, अंडा, बर्फ में संरक्षित मछली, नीबू, मशरूम, अदरक, शिमला मिच, गाजर समेत अन्य सीजनल सब्जियों की ढुलाई की जा रही है।

किसान ट्रेनों के संचालन के लिए नागपुर से दिल्ली के बीच संतरा ढुलाई के लिए विशेष तौर पर चलाने की योजना है, जिसे अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से चालू कर दिया जाएगा। जबकि पंजाब से पूर्वी राज्यों के बीच चलाई जाने वाली किसान ट्रेन किन्नू की ढुलाई के लिए चलेगी, जिसका संचालन दिसंबर में शुरु होगा। इसके अलावा बलिया से दिल्ली और बलिया से कोलकाता के बीच का भी प्रस्ताव मिला है।

 
 
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