मंत्रियों संग बैठक में PM मोदी बोले, ‘आंकड़े तो सेक्रेटरी भी दे देंगे, आप…’

मंत्रियों संग बैठक में PM मोदी बोले, ‘आंकड़े तो सेक्रेटरी भी दे देंगे, आप…’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार देर रात तक चली एक अहम बैठक में केंद्र सरकार के करीब 20 राज्य मंत्रियों के साथ लगभग तीन घंटे तक चर्चा की. बैठक में बीजेपी के अलावा सहयोगी दलों के मंत्री और स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे राज्य मंत्री भी शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चा के बीच इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों के कामकाज, उनकी उपलब्धियों और आने वाले समय की योजनाओं पर विस्तार से बात की. मंत्रियों से केवल अपने मंत्रालय के आंकड़े पेश करने के बजाय यह बताने को कहा गया कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर क्या योगदान दिया है. सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि मंत्रालय के आंकड़े तो सचिव भी बता सकते हैं. मंत्री को यह बताना चाहिए कि उसके नेतृत्व में क्या काम हुआ और उसकी अपनी भूमिका क्या रही. मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उनके मंत्रालय की योजनाओं से आम लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आया है.

2047 तक का विजन और अगले 5 साल का रोडमैप

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर भी खास चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से पूछा कि वे भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में अपने मंत्रालय की भूमिका किस तरह देखते हैं. मंत्रियों से अगले पांच साल के साथ-साथ 2047 तक के लिए अपना विजन और एक्शन प्लान साझा करने को कहा गया. इसका मकसद यह समझना था कि अलग-अलग मंत्रालय लंबे समय के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.

दलित, पिछड़े, आदिवासी और युवाओं पर फोकस

बैठक में सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर भी जोर रहा. मंत्रियों से पूछा गया कि दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासी समुदाय और युवाओं के लिए उनके मंत्रालय ने कौन-कौन से विशेष कदम उठाए हैं. शिक्षा, युवा कल्याण और आदिवासी विकास जैसे विषयों को बैठक में प्रमुखता मिलने की बात सूत्रों ने कही. प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों और आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए.

सोशल मीडिया पर भी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड

बैठक में मंत्रियों की सोशल मीडिया गतिविधियों की भी समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री ने जानना चाहा कि मंत्री सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और महत्वपूर्ण मुद्दों को सोशल मीडिया के जरिए जनता तक किस तरह पहुंचा रहे हैं. मंत्रियों से उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स, डिजिटल एंगेजमेंट और ऑनलाइन पहुंच को लेकर भी सवाल किए गए. सूत्रों के मुताबिक, सभी मंत्रियों को उनके सोशल मीडिया प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड भी दिया गया.

छात्रों से जुड़े मुद्दों और विपक्ष के नैरेटिव पर चर्चा

बैठक में छात्रों से जुड़े आंदोलनों और सोशल मीडिया पर विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे नैरेटिव का जवाब देने के तरीकों पर भी चर्चा हुई. मंत्रियों से पूछा गया कि वे ऐसे मुद्दों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकार का पक्ष कितनी प्रभावी तरीके से रखते हैं. सूत्रों के अनुसार, किसी भी राज्य मंत्री की सोशल मीडिया परफॉर्मेंस को पूरी तरह संतोषजनक रैंकिंग नहीं मिली. सभी को अपनी डिजिटल मौजूदगी और जनता से ऑनलाइन जुड़ाव बेहतर करने की जरूरत बताई गई.

मंत्री सिर्फ प्रशासनिक भूमिका तक सीमित न रहें

बैठक का एक बड़ा मैसेज यह रहा कि मंत्रियों को केवल मंत्रालय का प्रशासनिक काम संभालने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनसे अपनी व्यक्तिगत भूमिका, नेतृत्व क्षमता, भविष्य का विजन और जनता से सीधा जुड़ाव मजबूत करने की अपेक्षा की गई. संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच हुई इस बैठक ने मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर अटकलों को भी हवा दी है. हालांकि, बैठक के आधार पर किसी मंत्री के बदलाव या पद को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है.

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