बिजनौर में खेत की ढांग गिरी, मिट्टी में दबे दंपती, गंभीर
ग्राम गौसपुर में खेत पर चारा लेने गए थे गंगा किनारे, बड़ी मशक्कत से दोनों को निकाला गया सुरक्षित
एसडीएम, सीओ मौके पर पहुंचे, कटान क्षेत्र में ग्रामीणों को सतर्क रहने की दी सलाह
अवनीश जोशी, बिजनौर।
गंगा किनारे स्थित ग्राम गौसपुर में पशुओं के लिए चारा लेने गए दंपती अचानक भरभराकर गिरी खेत की ढांग की मिट्टी में दब गए। तेज आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से दंपती को उपचार के लिए चंदक भेजा है। घटना की सूचना पर एसडीएम और सीओ नजीबाबाद मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
ग्राम गौसपुर निवासी सत्यपाल 65 वर्ष व उनकी पत्नी उषा देवी गांव के निकट ही अपने खेत पर पशुओं के लिए चारा लेने गए थे। जब वह चारा काट रहे थे, इसी दौरान खेत की ढांग भरभरा कर गिर गई। ढांग गिरने से दोनों मिट्टी में दब गए। तेज आवाज व दंपति के शोर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दंपति को मिट्टी से निकला। सूचना पर थाना अध्यक्ष अन्नू कुमारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों की मदद से दोनों को उपचार के लिए चंदक भेजा गया। घटना स्थल पर ग्रामीण अरविंद, भूपेंद्र सिंह, भोपाल सिंह, ओमपाल, मुन्नू सिंह, दयाराम, सीताराम, धन सिंह, अमर सिंह, राकेश, राजेश प्रधान समेत बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान क्षेत्र में सुरक्षा उपाय मजबूत करने और लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान की मांग की है।सूचना पर एसडीएम शेलेन्द्र कुमार, सीओ अकांशा सिंह पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पंहुचे। गौसपुर के कटान क्षेत्र का एसडीम शेलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में अन्य अधिकारियों ने पूर्व में निरीक्षण किया था, ग्रामीणों को गंगा से दूरी बनाए रखने के लिए सचेत किया था।
ग्रामीणों की मुस्तेदी से बची जान
ग्रामीणों के मुताबिक ढांग गिरने के बाद कुछ ही समय में आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए थे। ग्रामीणों ने मिट्टी हटाकर दोनों को बाहर निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं होता तो जान जा सकती थी।
2013 से आबादी की ओर बढ़ रहा है गंगा का कटान
गौसपुर के ग्रामीण लंबे समय से गंगा के कटान की समस्या से जूझ रहे हैं। पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2013 से गंगा गांव की ओर लगातार कटान कर रही है। इस दौरान किसानों की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है। वर्ष 2022 में गांव और कटान क्षेत्र के बीच की दूरी करीब 60 मीटर तक ही राह गई थी।
स्टड और कटान सुरक्षा कार्य के बावजूद खतरा बरकरार
गंगा के कटान से गांव और कृषि भूमि को बचाने के लिए पिछले वर्षों में सिंचाई विभाग की ओर से कटान सुरक्षा कार्य और स्टड निर्माण कराया गया। वर्ष 2023 में गौसपुर के सामने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे स्टड निर्माण की 63 करोड़ रुपये की बाढ़ एवं कटान निरोधक परियोजना के तहत शुरुआत की गई थी। इसके बावजूद गंगा के किनारे खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए ढांग गिरने जैसी घटनाएं खतरे की गंभीरता को सामने ला रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजी-रोटी के लिए उन्हें गंगा किनारे खेतों में जाना ही पड़ता है, लेकिन कटान क्षेत्र में हर समय जमीन धंसने और खेतों के गंगा में समाने का खतरा बना रहता है।
