‘क्या छात्र आतंकवादी थे?’ AK-47 के आरोपों पर प्रियंका गांधी का सरकार से तीखा सवाल, संसद में विपक्ष का हंगामा
नई दिल्ली। बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर सोमवार को संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और सवाल किया कि क्या प्रदर्शन कर रहे छात्र आतंकवादी थे, जिनके खिलाफ AK-47 जैसे घातक हथियारों की जरूरत पड़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग कर रही है।
प्रियंका गांधी ने सरकार से मांगा जवाब
प्रियंका गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल छात्राओं के परिवारों को फोन कर उन पर प्रदर्शन से दूर रहने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है, इसलिए सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराने की कोशिश करनी चाहिए।
गृह मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग
कांग्रेस महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी संसद में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर AK-47 और दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसकी जानकारी संसद को दी जानी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि गृह मंत्री सदन में आकर पूरे मामले पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें।
मनीष तिवारी बोले- निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियार स्वीकार्य नहीं
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस के पास तय प्रक्रिया होती है, जिसमें पहले चेतावनी, फिर जरूरत पड़ने पर वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसे उपाय अपनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि गोलीबारी या अत्यधिक बल का प्रयोग केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही होना चाहिए।
उन्होंने बिहार की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई पुलिसकर्मी AK-47 लेकर छात्रों के पीछे दौड़ता दिखाई देता है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की भी मांग की।
दीपेंद्र हुड्डा ने भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने दिल्ली और बिहार की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज के दौरान कीलों और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जबकि बिहार में छात्रों के बीच AK-47 दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस तरह की कार्रवाई के आदेश किसने दिए।
कार्ति चिदंबरम ने उठाया पेपर लीक जांच का मुद्दा
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक मामलों की जांच को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले भी कई जांच समितियां बनाई गई थीं, लेकिन उनकी रिपोर्ट और उन पर हुई कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि नई समितियां केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि उनकी सिफारिशों पर प्रभावी कार्रवाई भी हो।
डिंपल यादव ने कार्रवाई को बताया चिंताजनक
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में युवाओं के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की घटनाएं बढ़ रही हैं। बिहार में AK-47 से जुड़े आरोपों को उन्होंने गंभीर और निंदनीय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
पप्पू यादव ने छात्रों के समर्थन में उठाई आवाज
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी छात्रों के समर्थन में सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को अपराधी या आतंकवादी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उनका आरोप था कि बिहार में बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया, जिससे भय का माहौल पैदा हुआ है। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
