मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान पर बढ़ा विवाद, आचार्य प्रमोद कृष्णम बोले- ‘गीता पढ़ते हैं, कृष्ण का नाम लेते हैं, खुद सनातनी हैं’
गाजियाबाद: भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान के बाद सियासी और धार्मिक हलकों में विवाद गहरा गया है। कई हिंदू संगठनों ने मौलाना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे पर विभिन्न संतों और धर्माचार्यों की भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी मौलाना के बयान पर निशाना साधते हुए कई अहम टिप्पणियां कीं।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि भारत के इतिहास में अनेक मंदिरों को ध्वस्त किया गया। उन्होंने सोमनाथ, अयोध्या, काशी, मथुरा और संभल के मंदिरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं पर जो लोग आज तक मौन रहे, वे अब नए-नए तर्क और ज्ञान की बातें कर रहे हैं। उनके मुताबिक, बाबर, सिकंदर लोदी और औरंगजेब जैसे शासकों के समय मंदिर तोड़े गए, लेकिन उस इतिहास पर चुप्पी साधने वाले अब धार्मिक विषयों पर बयानबाजी कर रहे हैं।
‘मौलाना जर्जिस खुद कृष्ण भक्त हैं’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने बयान में गीता के श्लोकों का उल्लेख किया और कई बार भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि मौलाना स्वयं सनातन परंपरा से जुड़े विचारों का सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा, “मौलाना ने भगवान कृष्ण को बार-बार याद किया है। भगवान राम और भगवान कृष्ण केवल हिंदुओं के नहीं, बल्कि उन लोगों के भी हैं जो उन्हें नहीं मानते।”
‘सनातन धर्म में वापसी की घोषणा करें’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा कि यदि मौलाना गीता और रामायण का अध्ययन करें तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि मौलाना को यह घोषणा कर देनी चाहिए कि वे सनातन धर्म में वापसी करना चाहते हैं। उनका कहना था कि जो व्यक्ति भगवान कृष्ण का स्मरण करता है और गीता का सम्मान करता है, उसका कल्याण निश्चित है।
जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर भी दी प्रतिक्रिया
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का संचालन होना अच्छी बात है, लेकिन हर संस्था को कानून के दायरे में रहकर काम करना होता है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा और न्यायपालिका पर भरोसा रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, बिना पूरी प्रक्रिया पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि कानून के अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में न्याय होगा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम गाजियाबाद स्थित प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर में वेद विद्यालय की रजत जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे थे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं।
